न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
नगर निगम द्वारा गृह व संपत्ति कर निर्धारण में पांच गुना वसूली पर समाजवादी पार्टी ने आंदोलन का एलान किया है। कहा कि इसके खिलाफ सपा जेल जाने से पीछे नहीं हटेगी। स्मार्ट सिटी के नाम पर खुदे पड़े शहर में पांच गुना गृहकर जनता के साथ मजाक है। जनता पहले से कमरतोड़ महंगाई से त्रस्त है। नगर निगम मूलभूत सुविधाओं के नाम पर नगरवासियों को कुछ दे तो पा नहीं रहा, ऊपर से ये बोझ और डाल दिया है।
ये बातें प्रेसवार्ता में शनिवार को सपा नेताओं ने कही। सपा के पूर्व महानगर अध्यक्ष अज्जू इशहाक, निवर्तमान महानगर अध्यक्ष अब्दुल हमीद घोषी, निवर्तमान महासचिव मनोज यादव ने कहा कि नगर निगम प्रशासन की नाकामी व हठधर्मी का इससे बड़ा उदाहरण और क्या हो सकता है, जैसे ही पांच गुना गृह व संपत्ति कर वसूलने का फरमान जारी हुआ, वैसे ही अब तक के इतिहास में रिकॉर्ड तोड़ आपत्तियों का अंबार लग गया है।
नगर निगम की नाकामियों को उल्लेख करते हुए सपा नेताओं ने बताया कि जनमानस को लक्ष्य बनाकर परेशान किया जा रहा है। इसका सपा पुरजोर विरोध करेगी। सपा लोकतांत्रिक तरीके से धरना प्रदर्शन करेगी। जरूरत पड़ी तो जेल भी जाएंगे। उन्होंने कहा कि संपत्ति व गृह कर का खुद भाजपा पार्षदों ने विरोध किया है। इसे लेकर नगर विकास मंत्री को ज्ञापन भी दिया है।
इस मौके पर वरिष्ठ नेता अश्वनी शर्मा, निवर्तमान जिला महासचिव मुकेश माहेश्वरी, रंजीत चौधरी, आमिर ईलू, इसरार सोलंकी, अर्जुन भोलू, पार्षद मुराद बच्चन, शकील राईन, मो.शाकिर, फारुन जग्गी, असलम नूर, हफीज अब्बासी, अजय चौधरी, आसिफ अल्वी, अफजाल हमीद आदि मौजूद रहे।
इन मुद्दों पर होगा विरोध---
- नगर निकाय की नियमावली 213 के विपरीत नगर निगम प्रशासन ने गलत फैसले लेने का काम किया है।
- 2017 में बिना आवश्यक मानकों और नियमों की अनदेखी कर कर निर्धारण किया गया, जो सर्वथा अनुचित है।
- गृह-संपत्ति कर की विसंगतियों को लेकर जो 5 सदस्यीय समिति गठित की गई, उस समिति की रिपोर्ट आने से पहले ही आदेश पारित करना गलत है।
- एक प्राइवेट कंपनी द्वारा कर निर्धारण बिना जमीनी हकीकत के किया गया, जो नाकाबिले बर्दाश्त है और कंपनी की कार्यप्रणाली संदिग्ध है।
- कर निर्धारण नियमावली में नवसृजित इलाकों को पूर्ण रूप से सुविधाओं से तृप्त करके ही कर वसूला जा सकता है, मगर ऐसा नहीं हो रहा है।
- नगर निगम द्वारा प्राइवेट कंपनी पर आंख बंद करके विश्वास किया गया। रिकार्ड के मुताबिक 65 हजार ऐसे नए भवन और संपत्तियों पर टैक्स की बोझ डाल दिया, जिनमें से 30 हजार से अधिक भवनों को चिन्हित कर पाना असंभव है, वे भवन तलाशे ही नहीं जा पा रहे हैं ।