पुलिस ने आरोपियों को जेल भेजने के साथ कुल 16 लोगों पर चार्जशीट दायर की। न्यायालय में सत्र परीक्षण के बीच दो आरोपियों क्वार्सी देवी नगला के गिरेंद्र व रायपुर गंजडुडवारा एटा के महेंद्र की मृत्यु हो गई। अब ट्रायल में साक्ष्यों व गवाही के आधार पर देवी नगला निवासी कालीन कारोबारी के नौकर रहे नीरज, इसी गांव के दो सगे भाई कृष्णहरि, शिवहरि, विजयगढ़ नगला बरी के बच्चू सिंह व एटा सिकंदरपुर वैश्य के पान सिंह को दोषी करार देकर सजा सुनाई है।
दो पार्ट में दी गई थी चार्जशीट
अभियोजन अधिवक्ता एडीजीसी तरुण वर्मा व वादी पक्ष के अधिवक्ता आलोक सिंघल के अनुसार इस अपहरण कांड में पुलिस ने विभिन्न कडि़यां जोड़ते हुए कुल 16 नाम उजागर किए। जिनमें कुछ को दबोचकर जेल भेजा था। कुछ अदालत में हाजिर हुए थे। इनमें वे लोग शामिल थे, जिन्होंने बच्चे को अगवा किया। उसकी योजना में शामिल रहे। बच्चे की रखवाली की। परिवार की निगरानी की। इन सभी को आरोपी बनाया गया था। जिस पर अदालत ने 2006 में संज्ञान लिया। ट्रायल में उन पांच को अदालत ने अपहरण का दोषी माना, जिन्होंने अपहरण किया या जिन्हें पकड़ा गया। बाकी जिनके नाम सामने आए। उनकी कहानी न जुड़ने के कारण बरी किया गया।
बालिग हुए स्कंद ने कनाडा से आकर दी गवाही
पुलिस की केस डायरी में कुल 15 गवाह सूची में थे। लेकिन, अपहृत हुए बच्चे स्कंद का नाम नहीं था। उसे बालक मानकर गवाही में शामिल नहीं किया गया था। जब ट्रायल अंतिम चरण में पहुंचा तो अदालत ने बच्चे को भी बुलाया। काफी दिन इंतजार के बाद उसे कनाडा से बुलाया गया। तब उसने अदालत के समक्ष पूरा वाकया बताया।
दिसंबर माह में अदालत में हाजिर हुए स्कंद ने बताया कि नीरज उनके यहां कर्मचारी थे। वह घर व कारखाने पर काम करता था। इसलिए वह उन्हें अच्छी तरह जानता था। घटना वाले दिन स्कूल की छुट्टी होते ही स्कूल के दरवाजे पर उसे नीरज मिला। बोला कि चलो पापा ने बुलाया है। वह उसके साथ साइकिल पर सवार होकर चला गया। रास्ते में घर के बजाय वे दूसरी दिशा में लेकर गया। इस पर स्कंद ने उसे टोका। लेकिन, उसने यह कह दिया कि किसी जगह काम से जाना है। कुछ आगे चलकर नीरज ने उसे यह कहते हुए कुछ खाने को दे दिया कि तुमको भूख लग रही होगी। इसके बाद वह सो गया। फिर जब उसे होश आया तो उसे किसी गड्ढे में रखा गया था। जब भी होश आता तो उसे कुछ खाने को दे दिया जाता। फिर वह सो जाता था। कई दिन बाद उसे पुलिस ने वहां से निकाला था। बाद में परिवार के सुपुर्द कर दिया। इस गवाही में स्कंद से कुछ सवाल जवाब भी किए गए।
मां-बहन के सामने आता फैसला तो वे भी खुश होते
कारोबारी संदीप मित्तल का कहना है कि वह अदालत के निर्णय संतुष्ट हैं। इस मुकदमे में उनकी पत्नी भी गवाह थीं। लेकिन, 2017 में आगरा में हुई सड़क दुर्घटना में उनकी पत्नी व बेटी की मृत्यु हो गई। अगर यह निर्णय उनके सामने आता तो वे भी खुश होते।
ये आरोपी हुए बरी
कृष्ण हरि-शिवहरि की मां भूरी, विजयगढ़ नगला बरी के बलवीर, भूरे उर्फ भूरी, महारानी, पिलुआ एटा के नेपाल, रामबेटी, सिकंदरपुर एटा के भगत सिंह, रेदाद, आलमपुर विजयगढ़ के योगेंद्र, बेनी शामिल हैं। ये सभी अपहरणकर्ताओं के सहयोग, बच्चे के छिपाने, निगरानी करने आदि के आरोपी बनाए गए थे।