इन गांवों में महिलाओं ने बताई सच्चाई
शोधकर्ताओं ने जिले के पांच गांवों में 250 परिवारों की गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिलाओं को अध्ययन में शामिल किया। इनमें भीमगढ़ी 35, जारौठ 34, मिर्जापुर 38, सुमैरा दरियापुर 127 और फरीदपुर से 16 महिलाएं शामिल हैं। विभागाध्यक्ष प्रो. सबा खान की निगरानी में शोधार्थी अर्चना गुप्ता ने जेएन मेडिकल काॅलेज के अलावा पंडित दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय सहित अन्य स्वास्थ्य केंद्रों पर आने वाली महिलाओं पर अध्ययन किया।
क्यों छूट रही हैं खुराक
प्रो. सबा खान ने बताया कि आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं के जरिए घर-घर जागरूकता अभियान चलाना जरूरी है। साथ ही मातृ एवं शिशु सुरक्षा कार्ड पर टीकाकरण की पूरी जानकारी दी जानी चाहिए ताकि कोई भी डोज छूट न जाए। उन्होंने कारण गिनाते हुए बताया कि टीकाकरण के पूरे शेड्यूल की जानकारी का अभाव, अस्पतालों में लंबा इंतजार, स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंच की दिक्कत, सामाजिक मान्यताएं और लापरवाही है। सरकारी अस्पतालों में प्रसव बढ़ा है, लेकिन फॉलोअप सेवाओं में कमी दिखाई दे रही है जो निरंतर निगरानी और जागरूकता बढ़ाने का संकेत है।