स्कूल हैं, शिक्षक हैं, फिर बच्चे कहां?
सवाल लाजमी है कि जब सरकारी स्कूलों में शिक्षक, भवन और योजनाएं मौजूद हैं, तो आखिर बच्चे कहां जा रहे हैं? क्या स्कूल चलो अभियान सिर्फ कागजों तक सीमित रह गया है, या फिर सरकारी शिक्षा व्यवस्था को लेकर अभिभावकों का भरोसा लगातार कमजोर हो रहा है? इस पर अधिकारियों ने कहा कि मानना है कि यह स्थिति केवल अभिभावकों के रुझान का परिणाम नहीं, बल्कि विद्यालय स्तर पर लापरवाही का भी नतीजा है। शासन की ओर से पहले ही शिक्षकों, शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को घर-घर संपर्क कर नामांकन बढ़ाने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद लक्ष्य पूरा न होना सवाल खड़े करता है।
शून्य नामांकन दर्ज होना गंभीर मामला
बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. राकेश कुमार सिंह ने बताया कि प्रेरणा पोर्टल पर कक्षा एक और छह में शून्य नामांकन दर्ज होना गंभीर मामला है। सभी विद्यालयों को नामांकन और सत्यापन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि इसमें लापरवाही पाई गई तो संबंधित प्रधानाध्यापकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और अप्रैल माह का वेतन भी रोका जा सकता है।
कहां कितने स्कूलों में शून्य नामांकन
- गंगीरी: 20
- अलीगढ़ (शहर): 16
- लोधा: 13
- अतरौली: 8
- इगलास: 7
- अकराबाद: 6
- धनीपुर, टप्पल, गोंडा: 4-4
- चंडौस, खैर, जवां, बिजौली: 2-3