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अलीगढ़ के मीट एक्सपोर्ट की धुरी हैं रोहिंग्या

Thu, 07 Sep 2017 01:47 AM IST
अमर उजाला, अलीगढ़
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भैंस
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अभिषेक शर्मा 
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पीएम नरेंद्र मोदी ने बर्मा म्यांमार के जिन रोहिंग्या लोगों का मुद्दा ब्रिक्स सम्मेलन में उठाया है, वह रोहिंग्या अलीगढ़ के मीट एक्सपोर्ट की धुरी हैं। वर्क परमिट व शरणार्थी के रूप में सैकड़ों की संख्या में रोहिंग्या अलीगढ़ की मीट इंडस्ट्री में रोजगार पा रहे हैं। अब यहां के रोहिंग्या मुसलमानों की निगरानी आदि के लिए खुफिया तंत्र सक्रिय हो गया है। इनके विषय में ताजा अपडेट लिया जा रहा है।

पीएम मोदी ने बुधवार को ब्रिक्स सम्मेलन में कहा कि पहले से ही बंाग्लादेश व अन्य देशों के शरणार्थियों का बोझ उठाने वाले भारत सहित अन्य देशों पर रोहिंग्याओं का बोझ पड़ रहा है। ऐसे में इनकी समस्या का निदान होना चाहिए। यहां खास बात यह है कि अलीगढ़ में भी करीब एक हजार रोहिंग्या रह रहे हैं। सामाजिक संस्था उड़ान द्वारा पिछले दिनों किए गए सर्वे के अनुसार ये लोग यहां मीट फैक्ट्रियों से आजीविका चलाने के लिए यहां आकर रह रहे हैं। उड़ान सोसाइटी के डायरेक्टर ज्ञानेंद्र मिश्रा का कहना है कि करीब दो-ढाई दर्जन रोहिंग्या तो भारत वर्क परमिट पर आकर मीट फैक्ट्रियों में काम कर रहे हैं। इन्हें मीट काटने में दक्ष माना जाता है। बाकी भी यहां इन्हीं कारखानों में रोजगार पाए हुए हैं। पिछले कुछ दिनों में इन शरणार्थियों की संख्या यहां बढ़ी है। बर्मा में इस मुद्दे को जब मोदी ने उठाया, तो अलीगढ़ का प्रशासन व खुफिया तंत्र इनके बारे में जानकारी जुटाने की कवायद में लग गया। 
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दुनिया में रोहिंग्या कटिंग मीट की डिमांड
मीट एक्सपोर्ट इंडस्ट्री की मजबूरी यह है कि दुनिया में रोहिंग्या कटिंग मीट की डिमांड सबसे अधिक रहती है। यह मीट कटिंग में माहिर होते हैं। इनके हाथ से कटे हुए मीट की विदेशी बाजार में बेहद मांग रहती है।

रेप की शिकार हो चुकी है एक महिला
पिछले साल एक रोहिंग्या महिला रेप की शिकार हुई थी। मामला पुलिस तक भी पहुंचा। शरणार्थी होने की वजह से उसे यहां की भाषा का ज्ञान भी नहीं था। वह अपनी बात भी स्पष्ट रूप से नहीं कह पाई। परिणामस्वरूप रेप के उस मामले में पुलिस ने रफा-दफा कर दिया। इस विवाद में दलाई लामा हॉल पर लगा ग्रहण कौशल कुमार ओझा 

म्यांमार के रोहिंग्या मुसलमानों से संबंधित विवाद में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के मौलाना आजाद लाइब्रेरी में स्थित दलाई लामा हॉल के झुलसने की आशंका है। रोहिंग्या मुसलमानों के पक्ष में एएमयू के छात्र गोलबंद होने लगे हैं। उन्होंने यूनिवर्सिटी प्रशासन पर मौलाना आजाद लाइब्रेरी में स्थित दलाई लामा हॉल का नाम बदलकर रोहिंग्या मुसलमान हॉल करने की मांग करने का निर्णय लिया है। 

म्यांमार में बौद्ध धर्म के अनुयायी एवं रोहिंग्या मुसलमानों के बीच तनाव चल रहा है। रोहिंग्या के देश से पलायन की खबरें आ रही है। बुधवार को एएमयू छात्रों ने इसको लेकर लाइब्रेरी कैंटीन के पास सभा का आयोजन किया। एएमयू छात्र संघ के निवर्तमान उपाध्यक्ष नदीम अंसारी ने बताया कि एएमयू छात्र जुमे की नमाज के बाद म्यांमार सरकार की अर्थी जुलूस निकालेंगे। मौलाना आजाद लाइब्रेरी स्थित दलाई लामा हॉल का नाम बदलकर रोहिंग्या मुसलमान हॉल करने की मांग यूनिवर्सिटी प्रशासन से करेंगे।
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ऐसा नहीं होता है तो आंदोलन होगा। कुछ छात्रों ने म्यांमार में मरने वाले रोहिंग्या मुसलमानों के लिए नमाज-ए-जनाजा का भी सुझाव दिया। ऐसे में एएमयू प्रशासन चौकन्ना हो गया है। कहा जा रहा है कि एएमयू के कुछ शिक्षक भी छात्रों के साथ है। उल्लेखनीय है कि एएमयू के मौलाना आजाद लाइब्रेरी में नोबल शांति पुरस्कार विजेता बौद्ध धर्म गुरू दलाई लामा के नाम पर हॉल है। इसमें छात्र बैठकर अध्ययन करते है। जानकारों का कहना है कि पद्मश्री डॉ. महमूद उर रहमान जब एएमयू के कुलपति थे, उसी समय यह हॉल बना था। विश्व विख्यात बौद्ध धर्म गुरू दलाई लामा स्वयं एएमयू में आए थे और हॉल का उद्घाटन किया था। 
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