बेसिक शिक्षा विभाग ने सेवानिवृत्त शिक्षक जगदीश प्रसाद के जीपीएफ (जनरल प्रोविडेंट फंड) पर एक-दो बार नहीं, बल्कि 35 बार में 34 लाख रुपये से ज्यादा का ऋण दे दिया, जबकि जगदीश प्रसाद का कहना है कि उन्होंने कोई ऋण नहीं लिया। वहीं, विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उनके नाम से ऋण रजिस्टर पर अंकित है। ऋण देने को लेकर विभाग व शिक्षक की भूमिका संदेह के घेरे में है। मामले को जांच के लिए दो सदस्यीय जांच टीम गठित कर दी गई है।
पूर्व माध्यमिक विद्यालय नरवारी टप्पल में सहायक शिक्षक जगदीश प्रसाद 31 मार्च को सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद फंड को लेकर आवेदन किया, लेकिन विभाग से बताया गया कि 34 लाख 34 हजार सात सौ इकहत्तर रुपये का ऋण है और उनके द्वारा पूर्व में जीपीएफ की सारी धनराशि ऋण के रूप में निकाल ली गई है। यह सुनकर वह हक्का-बक्का रह गए। यह ऋण शिक्षक को सेवाकाल में 35 बार दिया गया है।
जगदीश प्रसाद ने कहा कि उन्होंने कभी कोई ऋण नहीं लिया है। हालांकि, उन्होंने यह स्वीकार किया कि उनके बैंक खाते में विभाग से रुपये आते थे, जो एक कर्मचारी को खाते से निकालकर देते थे। इस संबंध में वित्त एवं लेखाधिकारी अनिल यादव ने कहा कि शिक्षक जगदीश प्रसाद के दो खाते हैं। तनख्वाह वाले खाते की बजाय दूसरे बैंक खाते में ऋण की धनराशि पहुंचती थी। इस मामले की जांच के लिए टीम गठित कर दी गई है।
उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष डॉ. प्रशांत शर्मा ने बताया कि शिक्षक का जीपीएफ हड़प लिया गया है। उन्होंने कहा कि जीपीएफ की धनराशि से अधिक ऋण स्वीकृत नहीं किया जा सकता है। अगर शिक्षक ने ऋण लिया था तो उसे कितनी बार नोटिस दिया गया और विभागीय कार्रवाई क्यों नहीं हुई। उन्होंने बीएसए को ज्ञापन देकर इस मामले में प्रकरण की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।