परिवहन निगम की रोडवेज बस विभिन्न रूटों पर पर्याप्त संख्या में न होने के चलते यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। यह समस्या वर्कशॉप में कई बसें खड़ी रह जाने से उत्पन्न हो जाती है। वर्कशॉप में तकनीकी खराबी के चलते कई बसों में मेंटेनेंस का काम होता है। जबकि चालक-परिचालक का पर्याप्त स्टाफ न होने के चलते भी कई बसें रूट पर नहीं निकल पाती हैं।
कोरोना काल के समय से ही रेलवे में केवल आरक्षित टिकटों पर ही लोगों को सफर करने की अनुमति है। जबकि कोरोना के बाद मिली छूट के बाद कुछ ईएमयू ट्रेन चलने पर लोग अपना सफर तय करते हैं। हालांकि रेलवे में टिकट न मिलने के बाद सीधा भार रोडवेज बसों पर रहता है।
लोग अपने निजी वाहन या रोडवेज बसों से सफर करने को मजबूर हैं। ऐसे में पर्याप्त संख्या में रोडवेज बस जब रूट पर नहीं मिलती हैं तो यात्रियों को घंटों तक बसों का इंतजार करना पड़ता है। वहीं किसी तरह बस मिल जाए तो भीड़ के चलते खड़े-खड़े भी सफर तय करना पड़ता है।
इस समस्या की मूल वजह वर्कशॉप के अंदर खड़ी हुई रोडवेज बस हैं। कुछ तकनीकी खराबी के चलते बस डिपो में रहती हैं, जबकि कई बस स्टाफ न आने के चलते वर्कशॉप से निकल नहीं पाती है। बता दें कि अलीगढ़ डिपो के पास संचालन के लिए कुल 115 बसें हैं। इनमें से 20 प्रतिशत से अधिक बस विभिन्न तकनीकी सामान के अभाव में खराब पड़ी हुई हैं।
इस डिपो की इन दिनों आउटशेडिंग (प्रतिदिन संचालित होने वाली बस) 75 चल रही हैं, लेकिन स्टाफ के अभाव के चलते बमुश्किल 50 बस ही निकल पाती हैं। जबकि बुद्धविहार डिपो के पास 133 बस हैं। इनमें से 25 प्रतिशत रोडवेज बस खराब पड़ी हुई हैं, जबकि इस डिपो की आउटशेडिंग 52 हैं। इनमें से 40 से 45 बस ही निकल पाती हैं।
इसका मुख्य कारण स्टाफ का ड्यूटी पर नहीं आना है। परिवहन निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक पद के प्रभारी व सेवा प्रबंधक विनोद कुमार ने बताया कि बसें चलती हैं तो खराब भी होती हैं। हालांकि क्रमानुसार बस सही भी हो जाती हैं। जबकि स्टाफ के न आने से बस नहीं निकल रही हैं। इस संबंध में जानकारी की जाएगी। एक-दो दिन में व्यवस्थाओं को दुरुस्त कर लिया जाएगा।