अब प्रस्तावित दूसरे रिंग रोड की बात करें तो अलीगढ़ विकास प्राधिकरण के मास्टर प्लान 2021-31 में जीटी रोड बाईपास को ही रिंग रोड का आधा हिस्सा बताया जा रहा है। जीटी रोड बाईपास का ये हिस्सा श्रीखेरेश्वर मंदिर चौराहा से पनैठी तक लगभग 17 किलोमीटर लंबा है। इस पर यातायात चालू है। इसको पूरा करने के लिए पनैठी-हरदुआगंज-अनूपशहर रोड-जीटी रोड हाईवे पर गाजियाबाद, मथुरा रोड, आगरा रोड से जोड़ने का प्रस्ताव मास्टर प्लान की डिजाइन में शामिल नहीं है। कुल मिला कर फरवरी 2024 में बने नये मास्टर प्लान में अभी तक पूरे रिंग रोड का कोई नक्शा तक नहीं बनाया जा सका है।
शहर में रिंग रोड बनाने के प्रस्ताव को लेकर जानकारी नहीं है। शासन से अगर ऐसा निर्देश आता है तो उस पर काम करेंगे।-इंद्रजीत सिंह, प्रोजेक्ट डायरेक्टर एनएचएआई।
अभी तक विभाग की ओर से रिंगरोड का कोई प्रस्ताव नहीं बनाया गया है। अगर शासन से निर्देश मिला तो काम करेंगे।-संजीव पुष्कर, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी।
दो दिन पहले लखनऊ में बैठक हुई है। रिंग रोड के लिए शासन के निर्देश आने का इंतजार है। निर्देश मिलते ही रिंग रोड पर काम शुरू होगा। मास्टर प्लान में भी इसको लेकर काम किया जाएगा।-अपूर्वा दुबे, एडीए वीसी।
रिंग रोड बनाने का कोई प्रस्ताव नगर निगम की ओर से नहीं बना है। एडीए और पीडब्ल्यूडी द्वारा पूर्व में बाईपास के लिए प्रस्ताव बनाया गया था, जिस पर कई बार चर्चा हुई। इसके आगे की जानकारी नहीं है।-सुरेशचंद्र, मुख्य अभियंता नगर निगम।
शहर को एक रिंगरोड की दरकार है। जो अलीगढ़-गाजियाबाद हाईवे, अलीगढ़-कानपुर हाईवे, अलीगढ़-पलवल हाईवे, प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे, मथुरा रोड, आगरा हाईवे, मुरादाबाद हाईवे, बरेली हाईवे को जोड़ कर शहर के बाहर से ही गुजरे। इसके लिए नये सिरे से एक कार्ययोजना बनाने की जरूरत है। भले ही इसमें जीटी रोड बाईपास के 17 किमी के हिस्से को शामिल किया जाए। बाकी हाईवे और सड़कों से बेहतर ढंग से जोड़ा जाए। अन्यथा रिंग रोड का उद्देश्य पूरा नहीं होगा।
विकास परियोजनाओं की मांग
अलीगढ़-पलवल हाईवे पर विकसित हो रहे डिफेंस कॉरिडोर अंडला, ट्रांसपोर्ट नगर, ग्रेटर अलीगढ़ और राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के लिए रिंग रोड की जरूरत है। इसी तरह से जीटी रोड पर बने अलीगढ़ एयरपोर्ट, प्रस्तावित जीटी रोड औद्योगिक जोन, छेरत औद्योगिक अस्थान, यूपीएसआईडीसी तालानगरी को जोड़ने के लिए रिंगरोड की जरूरत है, ताकि औद्योगिक विकास का पहिया तेजी से घूम सके।