खेल एसोसिएशन अलीगढ़ और मेडल के बीच में बाधा बन रही हैं। लखनऊ एथलेटिक मीट में यही हुआ। जिला एथलेटिक्स संघ की लापरवाही से ट्रैक पर तो अलीगढ़ के खिलाड़ी को दौड़े लेकिन गोल्ड मेडल का खिताब फर्रुखाबाद के खाते में चला गया।
लखनऊ के स्पोर्ट्स कॉलेज में 3-4 सितंबर को आयोजित राज्य स्तरीय अंडर - 14 , अंडर 16 एथलेटिक मीट में प्रतिभाग करने के लिए अलीगढ़ से महिला और पुरु ष वर्ग की 62 सदस्यीय टीम को जाना था। जिला एथलेटिक्स संघ के सचिव शमशाद निसार आजमी ने टीम का चयन भी कर लिया। एक निजी स्कूल के खेल शिक्षक को टीम मैनेजर की जिम्मेदारी दी गई।
खिलाड़ियों को उनका नंबर भी दे दिया गया। दो सितंबर को टीम लखनऊ की ट्रेन पकड़ने के लिए अलीगढ़ जंक्शन पहुंची तो वहां न तो सचिव पहुंचे और नहीं टीम मैनेजर। संपर्क करने के बाद खिलाड़ियों को पता चला कि एसोसिएशन ने टीम निरस्त कर दी है। कुछ तो घर लौट गए। कुछ इस उम्मीद में लखनऊ पहुंच गए कि शायद मैनेजर या एसोसिएशन से कोई बाद में पहुंच जाएगा।
इस तरह करीब 20 खिलाड़ी प्रतियोगिता स्थल पर पहुंच गए। आयोजकों ने जिला एथलेटिक्स संघ के सदस्य और मैनेजर विहीन अलीगढ़ की टीम को प्रवेश नहीं दिया। एक दर्जन खिलाड़ी खेल ही नहीं पाए। वहीं कुछ खिलाड़ियों ने कासगंज और फर्रुखाबाद में फीस देकर एंट्री कराई।
इससे उनको खेलने का मौका तो मिला लेकिन उनका प्रदर्शन अलीगढ़ की जगह उस जिले के खाते में जुड़ गया जिसके लिए वह खेले। इगलास के के मथल निवासी सोनू कुमार ने फर्रुखाबाद से एंट्री ली और ट्रायथलान (100 मी. लॉंग जंप, और शॉटपुट ) में गोल्ड मेडल जीता। यदि अलीगढ़ की टीम की एंट्री होती तो यह रिकार्ड तालानगरी का होता।
एथलीट प्रीति कश्यप, महिमा सिंह, सौरभ चौधरी, निमेश, पवन, निहित, मनोज अभय ने अमर उजाला को बताया कि स्टेशन पर पता चला एसोसिएशन हमारे साथ किसी को नहीं भेज रही है। वह चाहती तो हमको खेलने का मौका मिलता। हम अपने पैसों से लखनऊ पहुंचे। खुले में रात भी काटी और खेल भी नहीं पाए।