आगे-आगे ऊंट और घोड़े, पीछे रीछ-भालुओं के स्वरूप, गूंजते महाकाल के ढोल और बैंड की धुन पर थिरकते श्रद्धालु...। अचलताल स्थित श्रीरामलीला भवन से मंगलवार दोपहर निकली दशहरा शोभायात्रा में कुछ ऐसा ही नजारा दिखाई दिया। जय श्रीराम और हर-हर महादेव के जयघोष से पूरा मार्ग गूंज उठा। सड़क के दोनों ओर खड़े लोग प्रभु श्रीराम की सेना की एक झलक पाने को आतुर दिखे। कहीं पुष्पवर्षा हुई तो कहीं आरती उतारकर स्वागत किया गया। रंग-बिरंगी झांकियों के बीच आगे बढ़ती शोभायात्रा को देखने के लिए लोगों की भीड़ जुटती रही।
शोभायात्रा का शुभारंभ जिला पंचायत अध्यक्ष विजय श्योराज सिंह, प्रतिनिधि प्रवीण राज सिंह, श्रीरामलीला गोशाला कमेटी के अध्यक्ष विमल अग्रवाल समेत अन्य पदाधिकारियों ने हरी झंडी दिखाकर किया। इससे पहले प्रभु श्रीराम का पूजन हुआ। जैसे ही शोभायात्रा आगे बढ़ी, बैंड-बाजों की गूंज और धार्मिक जयकारों ने माहौल को भक्तिमय कर दिया।
शोभायात्रा में सबसे आगे ऊंट, घोड़े, रीछ, गोरिल्ला, भालू चल रहे थे। इनके पीछे गणेशजी, खाटू श्यामजी, आदियोगी, मां दुर्गा, राधा-कृष्ण, राम दरबार, भगवान शंकर और हनुमानजी की झांकियां थीं। कृष्ण-अर्जुन रथ की स्टील झांकी ने भी लोगों का ध्यान खींचा। मां जगदंबा, काली मैया और शिव-पार्वती के स्वरूपों के दर्शन करने के लिए लोग सड़क किनारे ठहर गए। हनुमानजी के स्वरूप ने भी श्रद्धालुओं को आकर्षित किया। श्रीराम की सेना में सुग्रीव, अंगद, हनुमानजी और जामवंत के स्वरूप वानर-भालुओं की सेना के साथ चल रहे थे।
शोभायात्रा में अलीगढ़ के अलावा इटावा, मेरठ, हापुड़ और सादाबाद के छह बैंड शामिल हुए। महाकाल ग्रुप ने भोलेनाथ के भजनों की प्रस्तुति दी। ढोल की थाप और बैंड की धुन पर श्रद्धालु झूमते रहे। हर तरफ जय श्रीराम के उद्घोष सुनाई देते रहे। अचल रोड से आगे बढ़ी शोभायात्रा आर्य समाज मंदिर, मदार गेट चौराहा, दुबे का पड़ाव और गांधीपार्क पहुंची। रास्ते में जगह-जगह स्वागत की तैयारियां दिखीं।
लोगों ने प्रभु श्रीराम के डोले पर फूल बरसाए और आरती उतारकर आशीर्वाद लिया। कई स्थानों पर आतिशबाजी भी की गई। मामू भांजा में पूजन के बाद मां काली की सवारी भी शोभायात्रा में शामिल हुई। इस बीच रावण का डोला प्रभु श्रीराम के डोले के आगे युद्ध का दृश्य प्रस्तुत करता चला। राम और रावण की सेना के प्रतीक स्वरूपों को देखने के लिए लोगों की निगाहें टिकी रहीं। धार्मिक नारों, ढोल-नगाड़ों और झांकियों के बीच शोभायात्रा आगे बढ़ती रही।