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अलीगढ़ : पाकिस्तान से आए रमेशलाल को भी मिली भारत की नागरिकता

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वर्षों के कड़े संघर्ष के बाद आखिरकार पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत से अराजकता के माहौल से दूर अलीगढ़ में आए रमेश लाल को भी भारतीय नागरिकता मिल गई है। इससे पहले 2019 के अगस्त माह में उनकी पत्नी को नागरिकता मिली थी। हालांकि उनके परिवार के अन्य सदस्यों को अभी नागरिकता का इंतजार है। फिलहाल अन्य सभी लोग लांग टर्म वीजा पर रह रहे हैं। गौरतलब है कि पाकिस्तान से आने के बाद भारत की नागरिकता पाने वाले यह तीसरे शख्स हैं जो अलीगढ़ में रह रहे हैं। इस दंपति से पहले फिरदौस नगर हमानियां मस्जिद के पास सिविल लाइन निवासी शब्बीर हुसैन पुत्र हुसैनी खां को आठ अक्तूबर 2015 को भारत की नागरिकता मिली थी।
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अराजकता से घबराकर आए थे भारत
पश्चिमी पाकिस्तान के बलूचिस्तान में वर्ष 1953 में जन्मे लाजवंती के पति व वर्तमान में नई बस्ती थाना बन्नादेवी निवासी रमेशलाल ने बताया कि उनकी पत्नी लाजवंती पाकिस्तान के सिंध इलाके की हैं। उनका विवाह वर्ष 1972 में हुआ था। वहां भी वह किराना की दुकान चलाते थे। उस समय बलूचिस्तान में अराजकता का माहौल था। वर्ष 2005 में वहां के नवाब की हत्या के बाद रोजाना बमबारी और अराजकता से घबराकर उन्होंने वर्ष 1968 से अलीगढ़ में रहकर किराना का काम करने वाले अपने भाई बच्चाराम से संपर्क किया और उन्हीं की प्रेरणा से 2005 में अलीगढ़ आ गए। यहां उन्होंने हाथरस अड्डे मदार गेट जैन मंदिर के पास पूजा जनरल स्टोर के नाम से दुकान खोली जो आज भी चल रही है।
रमेशलाल ने बताया कि पाकिस्तानी नागरिक होने के नाते वह और उनका परिवार एलटीवी यानि लांग टर्म वीजा के जरिये अलीगढ़ में रह रहा था। रमेशलाल ने बताया कि उन्होंने अपना, पत्नी लाजवंती, पुत्र कैलाश, बेटी पूजा की नागरिकता के लिए वर्ष 2015 में आवेदन किया था। रमेशलाल का एक बेटा हरेशलाल वर्तमान में बलूचिस्तान में ही रह रहा है। जबकि एक अन्य बेटा शंकरलाल एवं बहू वर्जनाबाई वर्ष 2013 में अलीगढ़ आ गए हैं। उन्होंने भी नागरिकता के लिए आवेदन किया है।
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