सिविल लाइंस क्षेत्र के अनौना हाउस इलाके में 16 वर्ष पूर्व अनुसूचित मजदूरों को बेरहमी से पीटने के मुकदमे में अदालत ने परिवीक्षा की सजा सुनाई है। इसमें एक दोषी 83 वर्षीय बुजुर्ग और तीन उसके बेटे हैं। यह फैसला एडीजे-विशेष एससीएसटी संजीव कुमार सिंह की अदालत से सुनाया है।
अभियोजन अधिवक्ता एडीजीसी चमन प्रकाश शर्मा के अनुसार घटना 13 अक्तूबर 2006 की है। हाथरस के सासनी बिर्रा के कालीचरन व जलालपुर के राजेंद्र सिंह ने 12 अक्तूबर को अनौना हाउस के मो.जफर के घर पुताई का काम किया। 13 अक्तूबर को वे मजदूरी का रुपया मांगने पहुंचे तो नामजदों ने घर से 50 हजार रुपये चोरी का आरोप लगाया। इस पर दोनों ने दलील दी कि अगर हम चोरी करते तो शायद यहां न आते।
इस पर दोनों को बंधक बनाकर खुंटी से टांगकर बेरहमी से पीटा गया। शरीर के संवेदनशील अंगों में पेट्रोल व मिर्ची तक डाल दी। किसी तरह बचकर वे आए और पुलिस को सूचना दी। मामले में मो.जफर उसके बेटे नौशाद, शाहिद व इमरान को नामजद किया गया। चार्जशीट के आधार पर न्यायालय में सत्र परीक्षण के दौरान साक्ष्यों व परिस्थितियों को देखते हुए चारों को दोषी करार देकर परिवीक्षा की सजा सुनाई है।
चारों को एक सप्ताह में 50-50 हजार रुपये के बंधपत्र प्रोवेशन अधिकारी के समक्ष देने होंगे। परिवीक्षा के दौरान सदाचारी रहेंगे और नियत तारीखों पर परिवीक्षा अधिकारी के समक्ष हाजिर होंगे। परिवीक्षा शर्तों का उल्लंघन करने पर पुन: अदालत सजा के बिंदु पर सुनवाई कर सकेगी।