पहले सीएए-एनआरसी उपद्रव और अब कोरोना काल। इस साल की शुरुआत से लेकर मई तक लगातार ऐसा दौर रहा कि पुलिस कर्मियों को छुट्टी मिलना बेहद कठिन था। किसी महत्वपूर्ण जरूरत या समस्या पर ही छुट्टियां मिल रही थीं।
ऐसे समय में अलीगढ़ जिले में दिन-रात काम कर रहे सिपाहियों से एसएसपी ने सीधे संवाद कर उनके उत्साहवर्द्धन का नया तरीका ईजाद किया है। वह सिपाहियों के जन्मदिन से लेकर उनकी शादी की सालगिरह तक पर सीधा संवाद स्थापित करते हैं और उन्हें बधाई देते हैं।
एसएसपी की ओर से बधाई मिलने पर सिपाहियों का सीना चौड़ा हो जाता है और उत्साह भी बढ़ता है। दिसंबर में जब अलीगढ़ में सीएए-एनआरसी को लेकर उपद्रव चल रहा था, तब छुट्टियां बंद थीं। बाद में होली का त्योहार आ गया, जिसके चलते छुट्टियां बंद कर दी गईं।
इससे निपटते ही बाबरी मंडी कांड में जख्मी तारिक की मौत के बाद शहर का माहौल गरमाया तो छुट्टियां बंद रखी गईं। जैसे ही हालात सामान्य हुए, तभी मार्च के अंत में कोरोना संक्रमण के कारण लॉकडाउन लागू हो गया। इस दौर में छुट्टी बंद होने का कोई आदेश तो नहीं था, मगर लॉकडाउन में आवाजाही बंद थी।
ऐसे में कोई छुट्टी लेकर कहां जाएगा, इसलिए पुलिस स्टाफ मजबूरी में या किसी जरूरत पर ही छुट्टी ले रहा था। इन हालात को देखते हुए एसएसपी मुनिराज जी ने सिपाहियों से उनकी समस्याओं, उनके कामकाज और उनके उत्साहवर्द्धन के लिए सीधे संवाद का नया तरीका खोज निकाला।
सोशल मीडिया सेल की मदद से जिले में सर्किल वार सिपाहियों का एक व्हाट्सएप ग्रुप बनवाया। सेल को ही जिम्मेदारी दी गई है कि प्रत्येक सिपाही के जन्मदिन, शादी की सालगिरह का अपडेट रखेगी और एसएसपी को अवगत कराएगी।
एसएसपी अपने फेसबुक एकाउंट से पोस्ट कर या सीधे सिपाही को फोन करके और व्हाट्सएप ग्रुप में बधाई देते हैं। बातचीत के दौरान उसकी समस्या, कामकाज, जरूरत आदि पर चर्चा भी होती है। पुलिस महकमे में यह एक सिपाही के लिए बड़ी बात होती है, जब कप्तान उससे दोस्ताना अंदाज में बात करता है।
ऐसे में सिपाही का सीना चौड़ा होना लाजमी है। इस प्रयास से टीम का मनोबल बढ़ता है। उसकी कार्यशैली भी बदलती है। एसएसपी मुनिराज जी कहते हैं कि यह प्रयास है सिपाहियों का मनोबल बढ़ाने और उनकी समस्याओं, जरूरतों से रूबरू होने का। वैसे देहात या शहर के भी सिपाही किसी मौके विशेष या समस्या लेकर ही मिलने आते हैं। इस तरह बातचीत से उनसे संवाद बनता है।