अनिल व विपिन पहले ही पकड़े जा चुके थे। बाद में सुधीर को पकड़ा गया व उससे निशानदेही से माल भी बरामद किया गया। इसी मामले में अदालत में पुलिस के सभी गवाह हुए लेकिन बचाव पक्ष से मई माह में अक्तूबर की शराब बरामद होने, बरामद माल की जांच रिपोर्ट न होने व बरामदगी की वीडियोग्राफी आदि साक्ष्य न होने के तर्क रखे। मुकदमे में न्यायालय में सत्र परीक्षण में पुलिस की कमजोर कहानी के आधार पर पांचों को बरी किया गया है।
ये हुआ था उस समय घटनाक्रम
लोधा के गांव करसुआ से 27-28 मई 2021 की रात जहरीली शराब कांड की शुरुआत हुई। इस कांड में 10 दिन में जिले भर में लगभग 125 लोगों की मौत हुई थी। पुलिस ने 28 मई को ही मुख्य आरोपियों में शामिल शराब व्यापारी अनिल को पकड़ लिया था। बाद में अनिल, उसके भाई सुधीर, अकराबाद के अधोन में फैक्टरी संचालक विपिन उर्फ ओमवीर, जवां के दूसरे शराब व्यापारी ऋषि शर्मा, मुनीष शर्मा आदि को डीएम स्तर से माफिया घोषित किया गया था। अनिल व ऋषि पर रासुका तक की कार्रवाई की गई थी। संपत्तियां तक कुर्क की गईं। बाद में सभी जमानत पर आ गए। इस कांड में 30 से अधिक मुकदमे दर्ज हुए थे। इसमें से पहले मुकदमे में ही पांच लोग बरी हुए हैं।
पुलिस की इन कमियों पर कोर्ट की टिप्पणियां
- किस आरोपी से कितनी शराब बरामद हुई। इन बयानों में विरोधाभास है। अभियोजन कहानी की सावधानी से समीक्षा किया जाना आवश्यक है।
- 31 मई 2021 को बरामद शराब के होलोग्राम पर बैच नंबर अक्तूबर 2021 अंकित है। यह तथ्य फर्द में नहीं है। यह कैसे संभव हुआ, स्पष्ट नहीं।
- बरामद शराब से संबंधित नमूना प्रयोगशाला नहीं भेजा गया, बल्कि अन्य साक्ष्य पेश किया गया। इस तरह संपूर्ण कहानी दूषित व संदेहास्पद प्रतीत हो रही।
- सुधीर की निशानदेही से दो माह 15 दिन बाद सड़क किनारे फेंकी शराब बरामद होने, बोरा व शराब खराब न होने की कहानी अत्यंत संदेहास्पद है।
- ऐसा प्रतीत हो रहा है कि विवेचना यांत्रिक रूप से किसी प्रशासनिक दबाव में की गई है। संपूर्ण अभियोजन कहानी विरोधाभासी व संदेहास्पद प्रतीत हो रही।