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अमर उजाला पड़तालः सिस्टम व सियासत की मिलीभगत से हुआ मौत का तांडव

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अभिषेक शर्मा
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जिले में मौतों का तांडव मचा हुआ है। अभी तक यह तय नहीं कि इसके लिए जिम्मेदार कौन है? मगर मौतों के हाहाकार के बीच इतना जरूर उजागर होता जा रहा है कि मौत का यह खेल सियासत और सिस्टम की मिलीभगत से चल रहा था। इस घटना के बाद कई ऐसे उदाहरण सामने आए हैं, जो चौंकाने वाले तो हैं ही। साथ में इस पूरे मौत के खेल को संरक्षण दे रहे सियासतदां और सिस्टम के अलंबरदारों को नंगा कर रहे हैं।
एक और भाजपा नेता का नाम सामने आया
अब तक इस खेल में सबसे बड़े तस्कर के रूप में रालोद नेता और पत्नी को जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव लड़ाने की तैयारी कर रहे अनिल चौधरी, भाजपा नेता निवर्तमान ब्लाक प्रमुख पति ऋषि शर्मा के नाम सामने आए। ऋषि के तो पिछले तीन दिन से जिले के हर दिग्गज भाजपा नेता के संग वीडियो फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे है। वहीं अब शहर में जहरीली शराब बेचने में सासनी गेट के रहने वाले भाजपा नेता रविंद्र पाठक उर्फ रिंकू का नाम सामने आया है। रिंकू के नौरंगाबाद ठेके से यह शराब बिकी थी। रिंकू भाजपा में सक्रिय हैं और 2017 के विधानसभा चुनाव में एड़ी चोटी का जोर लगाकर भाजपा से शहर सीट पर टिकट मांगा था।
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मिथाइल अल्कोहल के सप्लायर के समर्थन में सांसद
तालानगरी के कारोबारी मिथाइल सप्लायर विजेंद्र कपूर के समर्थन में सांसद उतर आए हैं। उन्होंने उनकी फैक्टरी पर दबिश के दौरान सीओ को फोन पर बात कर पहले जांच व फिर कार्रवाई की बात कही। सांसद के पड़ोस के फ्लैट में रह रहे विजेंद्र के घर जब पुलिस पहुंची तो भी सांसद ने पहले जांच की बात कही। इसे लेकर भी तरह तरह की चर्चाएं हैं। वहीं अब सप्लायर के यहां माल पकड़े जाने के बाद वह सिस्टम भी सवालों के घेरे में है, जिसे यह नहीं पता कि यहां इतनी मात्रा में माल आता है। बिकता है।
-ये भी खास प्रकरण
केस:-1
अधौन में मौत का सामान बनाने वाली फैक्टरी का सियासी कनेक्शन
पनैठी से सटे गांव अधौन में अवैध शराब फैक्टरी करीब दो साल से चल रही थी। इसे गांव सिंधौली का प्रधान गंगाराम, हाथरस के हसायन का हिस्ट्रीशीटर और सिकंदराराऊ से शराब तस्करी में वांछित शिवकुमार व मैनपुरी का विपिन यादव चला रहे थे। जगजाहिर है कि गंगाराम शराब का ठेकादार है। उसके नाम दो दुकानें हैं और उसने अपने क्षेत्र में ही रहने वाले सूबे के सत्ताधारी दल के जिले के एक कद्दावर नेता की मदद से धनीपुर के रहने वाले व्यक्ति से जमीन ली और वहां कारोबार शिवकुमार व विपिन संग शुरू किया। जब फैक्टरी चल पड़ी तो इलाके के पुलिस वालों, चौकी प्रभारी तक को फैक्टरी की ओर झांकने तक की अनुमति नहीं थी। आलम यह था कि नया-नया चौकी प्रभारी वहां पहुंचकर अगर यह जानने का प्रयास करे कि आखिर फैक्टरी में होता क्या है तो दरोगा पर उस सत्ताधारी का फोन आता था कि वहां जाने या झांकने की जरूरत नहीं है। बस इसी हनक के दम पर यह धंधा चल रहा था।
केस:-2
सिस्टम में तस्कर ठेकेदारों की मुखबिरों का जाल
वैसे तो सभी शराब तस्करों की आबकारी सिस्टम से लेकर अन्य में गहरी पैंठ होती है और मुखबिर होते हैं। मगर अपने जिले के आबकारी सिस्टम पर गौर करें तो यहां आबकारी के जिला स्तर पर छह निजी वाहन मय चालकों के संविदा पर संचालित होते हैं। ये सभी वाहन आबकारी की प्रवर्तन टीम के लिए हैं। टीम जहां जाएगी, वहां ये वाहन उन्हें लेकर जाएंगे। सभी वाहन जिले के शराब तस्करी रैकेट से जुड़े ठेकेदारों के हैं और उन्होंने अपने वाहन मय चालक आबकारी में संविदा पर लगा रखे हैं। इसके अलावा आगरा तक दो वाहन लगा रखे हैं। उन्हें अपने चालकों के जरिये वो हर मुखबिरी मिलती रहती है जो शायद तस्करों और ठेकेदारों के खिलाफ होती है।
केस:-3
बांकनेर में शराब फैक्टरी माफिया को कैसे मिली क्लीनचिट
खैर के गांव बांकनेर में 5 अगस्त 2019 को आबकारी व पुलिस की संयुक्त टीम ने कुंभा नाम के व्यक्ति के घर पर छापामार कार्रवाई कर नकली देशी शराब बनाने की फैक्टरी पकड़ी थी। वहां से भारी मात्रा में नकली शराब तथा स्प्रिट, केमिकल, होलोग्राम, खाली पौव्वे व बोतलें बरामद की थीं। शराब परिवहन में प्रयोग की जाने वाली बोलेरो गाड़ी भी बरामद की थी। उसी से अवैध शराब की सरकारी ठेकों पर सप्लाई की जाती थी। इसी कड़ी में गांव बामनी में एक नलकूप पर छापा मारा था। मगर आरोपी भाग गया था। उसकी पत्नी के नाम से उमरी मोड़ स्थित सरकारी ठेके से तीन पेटी अवैध शराब पुलिस ने बरामद की थी। मौके से सेल्समैन गिरफ्तार किया था। बाद में टप्पल थाने के गांव भरतपुर बझेड़ा के ठेके से सात पेटी अवैध शराब बरामद की थी। वहां भी अनुज्ञापी पत्नी व उसका पति भागने में सफल रहे थे। विक्रेता को पकड़ लिया था। दोनों मामलों में खैर व टप्पल में उन शातिरों पर नामजद मुकदमे दर्ज हुये थे लेकिन कार्रवाई केवल सेल्समैन तक ही अटक कर रह गई। बाकी सभी के नामों को क्लीनचिट दे दी गई।
केस:-4
फतेहपुर में आबकारी ने ठेका संचालक को नहीं माना दोषी
खैर के ही गांव राजपुर में 22 जुलाई 2020 को सरकारी दुकान के पीछे चल रही नकली शराब बनाने की फैक्टरी पकड़ी। यहां से 450 पेटी नकली शराब, 1000 लीटर शराब बरामद हुई थी। दो को गिरफतार किया था। गजब बात थी कि जिस मकान में फैक्टरी चल रही थी उसके बाहर शराब के सरकारी ठेके की दुकान थी। इसमें भी आबकारी ने कोई कार्रवाई नहीं की।
केस:-5
पिग फार्म में पकड़ी थी शराब की फैक्टरी
खैर के गांव भगतगढ़ी में 13 जुलाई 2020 को पुलिस व आबकारी टीम ने एक पिग फार्म पर छापामार कार्रवाई की थी। वहां से भी भारी मात्रा में प्लास्टिक के पीपों में भरी अवैध शराब, सील पैकिंग मशीन, मोनोग्राम, होलमार्क, ढक्कन, प्लास्टिक के पव्वे, नकली क्यूआर कोड, यूरिया, केमिकल आदि जखीरा बरामद किया था। मौके से एक को गिरफ्तार किया था। उस फैक्टरी के तार भी बड़े शराब माफियाओं से जुड़े थे लेकिन पुलिस के हाथ इस बार भी उन तक नहीं पहुंचे।
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केस:-6
ठेकेदार के घर मिली शराब फैक्टरी, बताया किरायेदार का माल
वर्ष 2020 में करीब आठ माह पूर्व गांव गौमत में पुलिस ने एक शराब ठेकेदार के मकान से अवैध नकली शराब बरामद की थी। मौके से एक कर्मचारी को भी गिरफ्तार किया था लेकिन बाद में सांठगांठ के दम पर यह दर्शाया गया कि जो व्यक्ति धंधा चला रहा था उसने मकान में एक कमरा किराये पर दे रखा था। शराब ठेकेदार का उससे कोई लेना देना नहीं था।
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