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अलीगढ़ शराब कांडः पुलिस विवेचना में ही बच जाते थे ऋषि-मुनि और अनिल-सुधीर

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सरकारी शराब ठेकों से बिकी जहरीली शराब ने लगभग 84 लोगों को हमेशा के लिए मौत की नींद दे दी है। पोस्टमार्टम हाउस में चार दिन से लाशों का आना बदस्तूर जारी है। गांव गांव कोहराम मचा है। वहीं इस कांड में मुख्य आरोपी भाजपा नेता ऋषि-मुनि शर्मा, रालोद नेता अनिल चौधरी-सुधीर चौधरी के पिछले अपराधों पर नजर डालें तो उनको हर बार विवेचना तक ही शामिल किया और उसके बाद नाम निकाल दिया जाता था। इसीलिए इन दोनों का हौसला इतना बढ़ गया कि ये लोग मौत ही बेचने लग गए।
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भाजपा नेता ऋषि की सरकारी ठेके की शराब की दुकान में गैर प्रांत की शराब बरामद होना कोई नई बात नहीं रही। अक्सर इसकी शिकायतें हुई और वह बहुत आसानी से इससे बचते रहे। जवां थाने में दर्ज अपराध संख्या 328/2014 के तहत दर्ज मुकदमे के तहत उनकी साथा स्थित लाइसेंसी शराब दुकान से 152 नकली देशी शराब, 18 पेटी हैवडर्स बीयर हरियाणा की बरामद हुई। आबकारी विभाग ने दुकान को सील किया। पुलिस ने मामले में लाइसेंसी ऋषि शर्मा व सेल्समैन को आरोपी बनाया लेकिन विवेचना में ऋषि का नाम निकल गया। दुकान की सील भी खुल गई। इसके बाद नौ फरवरी 2012 को थाना जवां क्षेत्र के अंतर्गत जवां ब्लॉक कार्यालय के आगे मैरिज होम पर पुलिस व आबकारी विभाग की टीम ने छापा मारा था
। जहां अवैध शराब फैक्ट्री चल रही थी। यहां भारी मात्री में लेवल, होलोग्रोम, क्वार्टर व अन्य माल बरामद हुआ था। इस मामले में ऋषि शर्मा व मुनि शर्मा के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। जिसमें इरफान, आबिद अली, शिव सिंह, शिवा भी आरोपी थे। इस मुकदमे की विवेचना से ऋषि-मुनि का नाम निकाल दिया गया।
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शराब कांड के तीसरे मुख्य आरोपी अनिल चौधरी ने अपने भाई सुधीर चौधरी के सात वर्ष 2000 में शराब के कारोबार में कदम बढ़ाया था। ये दोनों भाई आबकारी अधिकारी को रिश्वत कांड में फंसाने को लेकर चर्चा में आए थे। इसके बाद अवैध शराब के मुकदमों में घिरने पर तत्कालीन पुलिस प्रशासन की कृपा प्राप्त हुई।
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