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जहरीली शराब प्रकरणः अर्थियों से उठता रहा धुआं..ठंडे पड़े रहे चूल्हे

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कोरोना की थमती रफ्तार के बीच जहरीली शराब ने जिले में मौत का ऐसा तांडव मचाया है कि कोई भी पत्थर दिल सुनकर आह कर उठता है। बस एक ही आवाज आती है कि हाय ये शराब क्या कर गुजरेगी। ऊपर से शराब के नाम पर जहर बेचने वालों का जमीर मर गया है जो इस तरह लोगों की जानों से खेल रहे हैं। मौतों के आंकड़ों को सुनकर लोग यह भी कहने से न चूके कि क्या इस गोरखंधंधे में शामिल लोगों के बच्चे नहीं हैं। जिन लोगों ने इतने परिवारों को जीवन भर का ये दर्द दिया है। ऊपर वाला सब देख रहा है। शनिवार को टीम अमर उजाला ने जब जहरीली शराब से सर्वाधिक प्रभावित गांव करसुआ, अंडला में मौत का यह मंजर देखा तो इस तरह की बातें सामने आईं। गली के किसी छोर पर महिलाओं की चीत्कार सुनाई दे रही थी तो गांव के एक छोर पर शमशान स्थल में जल रही अर्थियों से धुआं ही धुआं उठता दिखाई दे रहा था। किसी का भी अंतरमन यह देखकर कांप उठ रहा था...
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तीसरी बार मिला करसुआ को इतना बड़ा दर्द
जहरीली शराब कांड में सबसे ज्यादा प्रभावित गांव करसुआ हुआ है। इस गांव में मौत का आंकड़ा दस के पार पहुंच गया है। मगर शुक्रवार शाम से लेकर शनिवार दोपहर तक 9 शव पोस्टमार्टम के बाद पहुंच गए थे। जैसे-जैसे शव गांव में पहुंच रहा था। तत्काल अंतिम संस्कार की औपचारिकताओं के बाद शव का पास के शमशान स्थल पर अंतिम संस्कार किया जा रहा था। इस दौरान बातचीत में गांव के रनवीर, विनय व सोहन लाल ने बताया कि उनके गांव में एक समयातंराल के बाद इस तरह के बड़े घटनाक्रम होते रहते हैं। करीब आठ साल पहले एक परिवार में आयोजित जन्मदिन समारोह में फूड प्वाइजनिंग से मौत हो गई थीं। तब कई दिन तक हाहाकार मचा रहा था। चार साल पहले 26 नवंबर 2017 की रात सोफा नहर में कार पलटे से इसी गांव के पांच लोगों की मौत हुई थी। वो इस गांव के लिए सबसे बड़ा हादसा था। इसके बाद अब गांव में इस घटना ने सभी को रुला कर रख दिया है।
गांव के हर छोर से उठ रहा था करुण क्रंदन
गांव का माहौल यह था कि एक परिवार में पिता-पुत्र की मौत हुई है। इन्हें मिलाकर दस से अधिक मौत हुई हैं। गांव में हर छोर से महिलाओं के करुण क्रंदन का शोर सुनाई दे रहा था। शुक्रवार शाम से शमशान स्थल पर एक-एक कर शव पहुंच रहे थे और दोपहर तक शवों के पहुंचने का सिलसिला जारी था। तो वहां से उठता धुआं गांव में हुई मौतों की गवाही दे रहा था। गांवों के किसी भी घर में न तो चूल्हे जले और न कोई काम हुआ। पशुओं तक के खाने दाने को लेकर लोगों ने इंतजाम नहीं किया गया।
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मुक्तिधाम की देहरी पर छूटा बूढ़ी मां का सहारा
गांव अंडला में टेलरिंग की दुकान करने वाले धीरज की बृहस्पतिवार देर शाम मौत हुई थी। वह भी अंडला से लौटते समय ककौला ठेके से शराब पीकर गया था। कस्बे में पहुंचने पर उसने सीधे घर जाने के बजाय पहले एक परिचित की दुकान पर अपनी सेव बनवाई। वहीं उसकी अचानक तबियत खराब हुई। इस पर वह वहां से उठकर अपने घर जाने लगा। मगर कस्बे में शिवधाम स्थित मुक्तिधाम के बाहर वह अचानक बेसधु होकर ऐसा गिरा कि फिर उठ न सका। इस पर लोगों ने समझा कि गरमी में किसी तरह तबियत बिगड़ने पर उसकी मौत हो गई है। परिवार में उसके पिता का पहले देहांत हो चुका है। एक बूढ़ी मां अकेली रहती है। उसे जब लोगों ने बेटे की मौत की खबर सुनाई तो उसका भी हाल बेहाल हो गया। वह समझ न सकी कि आखिर क्या किया जाए। इसके बाद लोगों ने उसके शव का बिना किसी को सूचना दिए अंतिम संस्कार कर दिया। मां अभी तक यह नहीं समझ पाई है कि उसके बेटे की किस वजह से मौत हुई और उसके जीवन का आखिरी सहारा चला गया।
भाई का शव भेजा और फिर खुद भी चल बसा
गभाना के गांव सांगौर के रहने वाले धर्मपाल की पचपेड़ा स्थित फैक्टरी में शुक्रवार सुबह लाश पाई गई। उसकी मौत की खबर पर बिलखती पत्नी और छोटा भाई सतीश भी पहुंचा। पुलिस को खबर दी और फिर खुद शव फैक्टरी से निकलवाकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। इस दौरान उसने किसी को खुद भी वही शराब पीने की जानकारी नहीं दी। अभी पोस्टमार्टम के बाद देर शाम तक धर्मपाल का शव लौटा भी न था कि देर शाम खुद सतीश की तबियत ऐसी बिगड़ी कि उसे परिवार वाले अस्पताल लेकर गए और मौत हो गई। एक साथ दो भाइयों की मौत पर परिवार में कोहराम मच गया। कोई कुछ समझ नहीं पा रहा था। बस एक ही बात कही जा रही थी कि आखिर अब इन दोनों के बच्चों का जिम्मा कौन संभालेगा।
पता नहीं था, वरना न जाने देती घर से
इन दिनों लॉकडाउन के कारण दुकानें तो बंद हैं। शराब से जान गंवाने वाला अंडला के देवेश की हलवाई की दुकान भी बंद थी। एक छोटे बेटे व दो बेटियों को साथ लिए बिलखती जा रही देवेश की पत्नी ज्योति ने रोते हुए बताया कि कई दिन से घर पर ही थे। कभी कभार पी आते थे। बृहस्पतिवार की दोपहर अचानक से घर से निकल गए। उसे नहीं पता था कि वह पीकर आएंगे। जब लौटे तो सब ठीक था। मगर जब उल्टी शुरू हुईं और सिर चकराने लगा तो पता चला कि शराब पीकर आए हैं। बस फिर क्या था। आनन-फानन उपचार दिलाया गया। मगर बचाया नहीं जा सका। अब तीन बच्चों का जिम्मा उसके सहारे आ गया है। वह समझ नहीं पा रही कि इन बच्चों का जीवन यापन कैसे होगा।
विधायक ने उठाया बच्चों की शिक्षा का जिम्मा
खैर क्षेत्र के भाजपा विधायक अनूप प्रधान ने कहा कि उनका क्षेत्र इस घटना में सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। वे अपने क्षेत्र में ऐसे बच्चों की सूची तैयार करा रहे हैं, जिनके पिता की मौत हुई है। परिवारों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है और बच्चों की पढ़ाई लिखाई तक नहीं हो पाएगी। उन बच्चों को स्कूलों में दाखिले कराने व पढ़ाने का जिम्मा वे उठाएंगे।
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