अनलॉक वन चल रहा है और धीरे धीरे सभी दुकानों के शटर खुलने लगे हैं। लोग 68 से 70 दिनों के बाद अपनी जरूरी खरीददारी कर रहे हैं। घर की जरूरतों के साथ पालतू बिल्ली, कुत्ता, घोड़ा, घोड़ी और उसका सामान लेने वाले पालतु जानवरों की दुकानों पर पहुंच रहे हैं। इन जानवरों का टीकाकरण कराने और इनके लिए जरूरी चीजों को खरीदने वाले भी निकल रहे हैं। ऐसे निजी पशु डाक्टर, दुकानदार भी अपने अस्पताल और दुकानें खोलने की तैयारी कर रहे हैं। इसी को देखते हुए स्टेट एनीमल वेलफेयर बोर्ड ऐसे निजी पशु अस्पताल और पालतु पशुओं की दुकानों का पंजीकरण, नवीनीकरण कराने और नियमानुसार व्यवस्था कराने में जुट गया है, ताकि इन बेजुबान जानवरों को बेहतर माहौल मिल सके। क्रय विक्रय में पारदर्शिता लाई जा सके।
इन बातों का रखना होगा ध्यान
-दुकान का नाम-पता, दुकान स्वामी का नाम-पता, दुकान का बेसिक और मोबाइल टेलीफोन नंबर, दुकान में मौजूद संसाधन, काम करने के घंटे, साप्ताहिक बंदी, अन्य अवकाश दिन, वेंटीलेशन की व्यवस्था, बिजली व बैकअप के साथ प्रकाश की व्यवस्था, फायर फाइटिंग के इंतजाम की जानकारी देनी होगी।
-दुकान में रखे गए जानवरों को उनके अनुकूल वातावरण देने के लिए संसाधन, बिजली जाने पर जेनरेटर या इनवर्टर के इंतजाम, जानवरों के खाने पीने का इंतजाम, जानवरों से होने वाला कूड़ा और उसका प्रबंधन, मरने वाले जानवरों के अवशेषों का इंतजाम, जानवरों के उपचार की सुविधा,जानवरों की प्रजाति का सूचना बोर्ड, उनको बेचने का रेट, उपलब्ध जानवरों की उम्र सहित पूरा ब्यौरा।
-विदेशों से आयतित पशु, मछली, परिंदों का पूरा ब्यौरा देना होगा। उनके क्रय विक्रय की अनुमति भी संबंधित विभाग के नियमों के अनुसार होनी चाहिए। क्रय विक्रय करने वाले पशु, परिंदों और मछलियों की आयु, उनके स्वास्थ्य संबंधी अभी अभिलेख, नियमानुसार टीकाकरण आदि की जानकारी रखनी होगी।
पशु क्रूरता अधिनियम के तहत अब ऐसे दुकानदारों को विस्तृत ब्यौरा देकर अपनी दुकान का पंजीकरण, नवीनीकरण कराना जरूरी होगा। अन्यथा की सूरत में उनके खिलाफ नियमानुसार विधिक कार्रवाई हो सकती है। बोर्ड की ओर से दुकानों के पंजीकरण, नवीनीकरण का फार्म प्रारूप भी सभी जिलों में भेजा गया है।
-डा. मेघश्याम, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी।