फिलहाल, सांसद सतीश गौतम पार्टी के भीतर अपने विरोधियों पर भारी पड़े और अपना 'होल्ड' टिकट वापस लाए। लेकिन उनकी दुश्वारी कम नहीं हुई। सबसे ज्यादा मेहनत और ऊर्जा उन्हें अपनी पार्टी के रूठे लोगों को मनाने में खर्च करनी पड़ी। कुछ माने तो कुछ आखीर तक नहीं माने। चुनाव से पूर्व तक प्रबल विरोध कर रहे एक कारोबारी को सतीश गौतम मनाने में सफल रहे। कुछ लोगों ने उन्हें अपनी नाराजगी जताते हुए दो टूक जवाब दे दिया। चुनाव प्रचार के दौरान भी सांसद को वोटरों की नाराजगी दूर करने के लिए काफी पसीना बहाना पड़ा। क्षत्रियों की नाराजगी की बात भी सामने आई। क्षत्रिय बहुल इलाके में मुख्यमंत्री योगी ने जनसभा भी की। ब्राह्मण बसपा उम्मीदवार हितेंद्र उपाध्याय उर्फ बंटी के लगातार स्वजातीय सम्मेलनों और बैठकों में भागीदारी ने भी सतीश गौतम को परेशान किया। बसपा 2019 के चुनाव में दूसरे नंबर पर रही थी। पार्टी के ट्रैक रिकार्ड और पारंपरिक वोटों की नैया पर सवार होकर भी वह सफलता की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
भाजपा उम्मीदवार को मोदी-योगी के करिश्मे से ही आस
एक सांसद के तौर पर सतीश गौतम की हैट्रिक बहुत हदतक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के करिश्मे पर टिकी है। मतदान के दिन ऐसे कई वोटर देखे गए जिन्होंने अपनी नाराजगी तो सतीश गौतम से जताई लेकिन मोदी और योगी के काम को बेहतरीन बताते हुए भाजपा को वोट डालने की बात कही। 2019 के चुनाव से लगभग छह फीसदी मतदान इस बार कम हुआ। संकेत साफ है कि मतदाताओं ने उत्साह कम दिखाया। इस बार का चुनाव अनूठा इसलिए भी था क्योंकि स्थानीय जनप्रतिनिधि के प्रति नाराजगी के बाद भी भाजपा के पारंपरिक वोटरों में योगी-मोदी के प्रति अनुराग और आकर्षण कम नहीं हुआ।
राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का भी होगा असर
अलीगढ़ ने राममंदिर आंदोलन को दो बड़े नायक दिए हैं। विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अध्यक्ष अशोक सिंघल और हिंदू हृदय सम्राट की छवि रखने वाले पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह। दोनों इस दुनिया में नहीं हैं। लेकिन 22 जनवरी 2024 को अयोध्या में हुए राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के भव्य कार्यक्रम के बाद यहां के लोगों पर अशोक सिंघल और कल्याण सिंह की खासी चर्चा रही। इस अवसर पर घर-घर में लहराए गए भगवा ध्वज भी कार्यक्रम की महत्ता और असर को बयान करते रहे। 22 जनवरी के बाद से गंगा में बहुत पानी बह गया है। लोगों पर इसका कितना असर बाकी था, यह भी देखना होगा।
सपा उम्मीदवार चौधरी बिजेंद्र सिंह को स्वाभाविक तौर पर एम-वाई (मुस्लिम-यादव) के पारंपरिक वोटों का भरोसा था। जाट बिरादरी से ताल्लुक रखने वाले चौधरी बिजेंद्र को उम्मीद है कि उन्हें अपनी बिरादरी के मतदाताओं ने खूब आशीर्वाद लुटाया है। इस बार चौधरी जयंत के भाजपा गठबंधन में शामिल होने के बाद भाजपा जाट वोटरों के साथ होने की आशा कर रही थी। लेकिन संभावना को बिजेंद्र सिंह ने खारिज किया है। उन्होंने अपनी उम्र का हवाला देते हुए अपना भावुक चुनाव प्रचार किया। बिरादरी के बुजुर्गों के समक्ष उन्होंने पगड़ी की लाज रखने की भी बात कही। उनके प्रचार के तौर-तरीकों की खासी चर्चा भी रही। कहा जा रहा है कि बिजेंद्र सिंह को जाटों के मत बड़ी संख्या में मिले हैं। उनके अपनी जीत के दावे का अपना तर्क है।
बसपा को नए नायक आकाश आनंद और माया के असर का भरोसा
बसपा उम्मीदवार हितेंद्र उपाध्याय उर्फ बंटी के पक्ष में बसपा के नए नायक और मायवती के भतीजे आकाश आनंद ने सबसे पहले बैटिंग की। चुनाव प्रचार थमने के एक दिन पहले मायावती ने बड़ी चुनावी सभा करके इस बात को सिद्ध किया कि बसपा अलीगढ़ की सीट पर गंभीरता के साथ चुनाव लड़ रही है। रणनीतिक तौर पर ब्राह्मण की उम्मीवारी से वह भाजपा को पहले ही चौंका चुकी थी। माया ने अपनी सभा में मुस्लिम मतदाताओं को लुभाने पर खास ध्यान दिया। लगभग तीन लाख ब्राह्मणों के वोट में सेंधमारी, अपने कैडर वोट के साथ मुस्लिम मतदाताओं के वोट के भरोसे बसपा उम्मीदवार दम भर रहे हैं।