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जमीन अधिग्रहण के रेट तय होने के इंतजार में अलीगढ़ पलवल स्टेट हाईवे

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अलीगढ़ पलवल हाईवे निर्माण का निरीक्षण करते एक्सईएन एके शर्मा। - फोटो : CITY OFFICE
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आशीष निगम
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जिले के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अलीगढ़ पलवल हाईवे को चार साल बाद भी पूरा नहीं किया जा सका है। अभी तक इसके दो महत्वपूर्ण बाईपास, दो व्यस्ततम पुल और किमी नंबर 39 से 45 तक पेड़ों के कटान नहीं होने से कार्य अधूरा है। प्रशासनिक सुस्ती का आलम ये है कि अभी तक खैर और जट्टारी बाईपास निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण होने का रेट तक तय नहीं हुआ है, जिससे जमीन नहीं ली जा सकी है। चार साल में भी इस 67 किमी लंबे हाईवे का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है। अगर दिनों का गणित से हिसाब लगाएं तो एक दिन में 21 मीटर का काम भी पूरा नहीं कर पाया सरकारी सिस्टम।
नौ साल में नहीं ली एक इंच जमीन
वर्ष 2010 में यमुना एक्सप्रेस वे तैयार होने के साथ ही तत्कालीन बसपा सरकार ने टपल्ल इंटरचेंज से अलीगढ़ तक बेहतर कनेक्टिविटी देने के लिए वर्ष 2011 में जट्टारी बाईपास बनाने की योजना बनाई। इसके लिए प्रस्ताव बना। लगभग साढ़े पांच किमी लंबे बाईपास के लिए जमीन लेने और निर्माण करने की कवायद शुरू हो गई, लेकिन आपको जानकार हैरत होगी अभी तक एक इंच जमीन नहीं ली गई।
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18 महीने में जगह नहीं ले पाए
अलीगढ़ पलवल हाईवे पर खैर में दस किमी लंबा बाईपास बनना है। अभी तक इसके लिए भी जमीन नहीं खरीदी जा सकी है। अभी तक ये काम प्रांतीय खंड एक के पास था, लेकिन 18 महीने में जमीन खरीदने की प्रक्रिया शुरू नहीं होने से गुस्साए चीफ इंजीनियर ने अब ये काम नोडल आफिस को सौंप दिया है। नोडल आफिस के एक्सईएन एके शर्मा ने बताया कि अब वो प्रक्रिया शुरू करा रहे हैं।
हाईवे का वर्तमान स्टेटस
- हाईवे की लंबाई 67.5 किमी, चौड़ाई दोनो ओर 8.75-8.75 मीटर तक। बीच में एक ग्रीन बेल्ट।
- वर्ष 2016 में टप्पल पलवल अलीगढ़ हाईवे को मंजूरी मिली, 552.28 करोड़ रुपये मंजूर किए गए।
- लगभग 38 किमी तक तारकोल और आठ किमी की लंबाई में सीसी रोड का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है।
- सोफा नहर पुल और बझेड़ा पुल के साथ पेड़ों के कटान के कारण लगभग पांच किमी में निर्माण अटका है।
- इसके अलावा खैर और जट्टारी बाईपास का निर्माण कार्य अब तक शुरू नहीं हो पाया है।
वन निगम काटेगा 917 पेड़
हाईवे के निर्माण में 7612 पेड़ काटे जाने थे, जिसमें 6625 पेड़ ही कट पाए हैं। शेष 917 पेड़ों के कटाने की अनुमति हाल ही में मिली है, लेकिन वन निगम कारपोरेशन इटावा ने अभी तक ये पेड़ नहीं काटे हैं। अब इन पेड़ों का छपान यानी पहचान कर ली गई है, उनके नंबर डाल दिए गए हैं। जुलाई अंत तक इनका कटान हो जाएगा।
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खैर और जट्टारी बाईपास के निर्माण का बजट पूर्व घोषित बजट में शामिल था लेकिन जमीन अधिग्रहण की धनराशि उसमें शामिल नहीं थी इसलिए ये काम अब तक पूरा नहीं हुआ था। अब 30.47 करोड़ रुपये का प्रस्ताव विभाग के माध्यम से शासन को भेजा गया है। ये प्रस्ताव मंजूर होते ही धनराशि मिल जाएगी। इसके बाद जमीन का अधिग्रहण होने लगेगा। इसके लिए जिला प्रशासन की बैठक होगी, जिसमें जमीन के अधिग्रहण का रेट तय होगा। ये कार्य जिलाधिकारी के स्तर से ही होना है।
- एके शर्मा, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी नोडल आफिस।
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