पीएसी में भरती होकर ट्रेनिंग तक पहुंचे रिक्रूट की जालसाजी का भंडा फूट गया है। युवक ने भरती होने के दौरान अपनी जगह पर किसी और की नाप करा दी थी। जब वह जनरल ट्रेनिंग सेंटर (45 वीं वाहिनी) पहुंचा तो जांच में उसकी नाप में कुछ गड़बड़ पाई गई। हालांकि इस दौरान उसे कुछ न बताकर गोपनीय जांच कराई तो सच्चाई उजागर हो गई। सच्चाई सामने आते ही पीएसी में हड़कंप मच गया। मामले में आरोपी रिक्रूट पर मुकदमा दर्ज कराया गया है और पुलिस ने आरोपी को रविवार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
घटनाक्रम के अनुसार फिरोजाबाद के नसीरपुर थाना क्षेत्र के गांव नगला पिपरानी हरिहा निवासी रतन सिंह पुत्र हरविलास सिंह ने कानपुर में पीएसी की भरती देखी थी। जहां उसका पेपर सत्यापन के साथ-साथ शरीर की नाप-जोख आदि हुई। उनके आवेदन पर उन्हें अनुक्रमांक नंबर 1281070246 एलाट हुआ था और एक महीने की जनरल ट्रेनिंग के लिए पीएसी 45वीं वाहिनी अलीगढ़ एलाट हुई। जून माह की इस एक महीने की ट्रेनिंग में 30 जून को फिर से शरीर की नाप हुई तो उसकी सीने की चौड़ाई व शरीर की लंबाई में अंतर पाया गया। चूंकि वह यहां एक महीने की ट्रेनिंग पूरी कर 9 महीने की ट्रेनिंग के लिए अगले ही दिन गौतमबुद्ध नगर पीएसी रवाना हो गया। इसलिए पीएसी जेटीसी प्रभारी मोहन सिंह ने पूरा वाकया कमांडेंट को बताया और बात को गोपनीय रखते हुए प्रारंभिक जांच शुरू कराई। जांच में यहां से लेकर कानपुर तक सच्चाई पता करने पर जानकारी में आया कि रतन सिंह ने कानपुर में भरती देखने के दौरान अपने स्थान पर किसी अन्य की नाप कराई थी।
पांच दिन पहले रतन सिंह के खिलाफ रिपोर्ट गौतमबुद्ध नगर पीएसी भेजी गई, जहां से उसे ट्रेनिंग से वापस पीएसी अलीगढ़ भेज दिया गया। इधर, इस मामले में मोहन सिंह की ओर से क्वार्सी में रतन सिंह पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज
कराया गया, जिसकी विवेचना करते हुए एसआई रामविरेश यादव ने आरोपी रतन सिंह को रविवार दोपहर पीएसी 45 वीं वाहिनी से गिरफ्तार कर लिया। रतन को रिमांड मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश कर जेल भेज दिया।
इंस्पेक्टर क्वार्सी छोटेलाल के अनुसार मामले की जांच व पूछताछ में अभी तक रतन सिंह ने यह स्वीकार नहीं किया है कि उसने किसकी नाप कराई थी। इस काम में उसकी किसने मदद की थी। इसके लिए अभी विवेचना जारी है। उन्होंने बताया कि हो सकता है कि इस रैकेट में और भी लोग शामिल हों। इसके लिए पुलिस व पीएसी की जांच टीम लगी हुई है।