कौशल कुमार ओझा
पंडित दीनदयाल संयुक्त चिकित्सालय में करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए 36-36 बेड के तीन वार्डों का इस्तेमाल कबाड़खाने के तौर पर हो रहा है। यह स्थिति तब है, जब कोरोना काल में मरीजों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर टेंट हाउस से गद्दे व अन्य सामान आदि मंगाने की तैयारी चल रही है। शनिवार को जिले के नोडल अधिकारी व प्रमुख सचिव नितिन रमेश गोकर्ण ने दीनदयाल अस्पताल का निरीक्षण किया, उन्होंने इन वार्डों के बारे में जानकारी की तो स्वास्थ्य विभाग के अफसर उनको इन वार्डों को नहीं दिखा पाए। महिला वार्ड स्थित गोल सीढ़ी के पास इन तीनों वार्ड में बेड व मेडिकल उपकरण मौजूद हैं, जिनका बिना अतिरिक्त खर्च किए आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है।
करीब 21 साल पहले पंडित दीनदयाल संयुक्त चिकित्सालय का भवन बना था। दुर्भाग्य है कि इसके बहुत बड़े हिस्से का आज तक स्वास्थ्य विभाग द्वारा ठीक से इस्तेमाल तक नहीं किया गया है। कोरोना काल में जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी केविड-19 एल-1 हॉस्पिटल बनाने के लिए जगह की खोज रहे हैं। टेंट हाउस से सामान आदि मंगाने की तैयारी में है। जबकि पंडित दीनदयाल संयुक्त चिकित्सालय में करीब 20 हजार स्क्वायर फीट में 36-36 बेड के तीन वार्ड खाली पड़े हैं। यहां बेड, गद्दा व मेडिकल से संबंधित अन्य कई उपकरण मौजूद हैं। इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ आईसीयू स्तर का भवन मौजूद है। हैरान करने वाली बात यह है कि इन खाली वार्डों की जानकारी यहां के प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों तक को नहीं थी या जानबूझकर छिपाया जा रहा था।
शनिवार को पीडब्लूडी विभाग के प्रमुख सचिव एवं नोडल अधिकारी नितिन रमेश गोकर्ण ने इन खाली वार्डों की जानकारी ली तो अधिकारियों में हड़कंप मच गया। जिलाधिकारी, सीडीओ से लेकर सीएमओ एवं सीएमएस तक वहां मौजूद थे। प्रमुख सचिव खुद इन खाली वार्डों को देखना चाहते थे लेकिन अस्पताल प्रशासन उन्हें वार्ड नहीं दिखा पाया, जबकि महिला वार्ड स्थित गोल सीढ़ी के पास ये तीनों वार्ड स्थित हैं। बाद में एसीएम द्वितीय रंजीत सिंह एवं सीएमओ डॉ. बीके सिंह कल्याणी ने कोल विधायक अनिल पाराशर एवं अन्य लोगों के साथ इन वार्डों को तलाशा। जब अधिकारी एवं विधायक इन खाली वार्डों में पहुंचे तो वहां की स्थिति देखकर चौक गए। 36-36 बेड के तीन वार्ड का कोई इस्तेमाल नहीं हो रहा था। बेड, गद्दा व मेडिकल से संबंधित उपकरण कबाड़ की तरह रखे थे। एसीएम रंजीत सिंह ने कहा कि इसमें सभी चीजें मौजूद हैं। इसे एक सप्ताह से लेकर 15 दिन में चालू करा दिया जाएगा। गौरतलब हो कि पं. दीनदयाल संयुक्त चिकित्सालय का भवन इतना विशाल और व्यापक क्षेत्र में फैला है कि सामान्यत: अधिकारी भवन का पूरा चक्कर भी नहीं लगा पाते।
विधायक अनिल पाराशर ने प्रमुख सचिव से की थी शिकायत
प्रमुख सचिव गोकर्ण की शुक्रवार को जन प्रतिनिधि और अधिकारियों के साथ बैठक हुई थी। जिसमें कोल विधान सभा क्षेत्र के विधायक अनिल पाराशर ने उनको पं. दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल के बारे में जानकारी दी थी। अनिल पाराशर ने 23 मई 2020 को इससे संबंधित एक पत्र मंडलायुक्त, नोडल ऑफिसर, डीएम व सीएमओ को भी भेजा था। शनिवार को पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय में पहुंचे नोडल अधिकारी ने डीएम चंद्रभूषण सिंह, सीडीओ अनुनय झा, सीएमओ डॉ. बीपी सिंह कल्याण एवं सीएमएस डॉ. एबी सिंह की मौजूदगी में खाली पड़े वार्डों को देखने की इच्छा व्यक्त की। प्रमुख सचिव को लेकर अधिकारी इमरजेंसी के पीछे की ओर गए। लेकिन वहां कुछ नहीं मिला।
सच्चाई तो यह है कि विधायक के पत्र पर किसी ने गौर ही नहीं किया था। सूचना के बाद विधायक अनिल पाराशर भी पहुंच गए। उन्होंने कुछ इंजीनियर आदि को भी बुला लिया। अनिल पाराशर ने बताया कि शुक्रवार को इस संबंध में उन्होंने प्रमुख सचिव से कहा था। उन्होंने उसका संज्ञान लिया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग किराए पर बेड व सामान ले रहा है। जबकि यहां 100 बेड व गद्दे के साथ मेडिकल से अन्य उपकरण भी मौजूद है। मामूली सुधार करके यहां 100 बेड का कोविड-19 का हॉस्पिटल बनाया जा सकता है।