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अलीगढ़ः सूबे में चाहें जहां खरीदें वाहन गृह जनपद का ही मिलेगा नंबर

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फरीदउद्दीन। आरटीओ प्रवर्तन। - फोटो : CITY OFFICE
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राजा तिवारी
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अब उत्तर प्रदेश के किसी भी जिले से वाहन खरीदने पर मालिक के आधार कार्ड पर अंकित गृह जनपद के पते के आधार पर ही वाहन नंबर जारी किया जाएगा। अगर वीआईपी नंबर लेने की सोच रहे हैं तो परिवहन विभाग की वेबसाइट पर पहले ऑनलाइन आवेदन करना होगा, क्योंकि वाहन खरीदने के बाद वीआईपी नंबर जारी नहीं होगा। यह नियम जल्द ही नई पंजीयन व्यवस्था के तहत लागू हो जाएगा।
उन्नाव जिले में इन दिनों वाहन पंजीयन के लिए पॉयलेट प्रोजेक्ट चल रहा है, जिसके आधार पर आरटीओ की जगह अब डीलर ही वाहनों के नंबर जारी कर रहे हैं। इस प्रोजेक्ट के सकारात्मक परिणाम मिले हैं। इसीलिए यह अब पूरे प्रदेश में लागू होगा। इससे पहले परिवहन विभाग के अधिकारी डीलरों को इस प्रक्रिया का प्रशिक्षण दे रहे हैं। नई व्यवस्था के तहत आरटीओ दफ्तर से जारी होने वाले नंबर अब डीलर के यहां से ही मिलेंगे। वाहन निर्माता कंपनी अपने वाहनों का डाटा ऑनलाइन पोर्टल पर फीड करती है। ग्राहक शोरूम पर वाहन खरीदने जाएगा तो डीलर वाहनों का डाटा ऑनलाइन ग्राहक को दे सकेगा। इसके बाद ग्राहक के आधार नंबर को दर्ज करते ही ओटीपी जनरेट होगा। आधार कार्ड के पते के आधार पर ग्राहक को मूल जनपद का पंजीयन नंबर जारी हो जाएगा। अगर वीआईपी नंबर लेना है तो इसके लिए परिवहन विभाग की वेबसाइट पर फैंसी नंबर के लिए आवेदन करना होगा। अगर वाहन खरीद लिया तो ऑटोमैटिक जनरेट होने वाला नंबर मिलेगा। बाद में इसके बाद वीआईपी नंबर नहीं लिया जा सकता है। इसके अलावा, अन्य प्रदेश में वाहन ले जाना है तो अस्थायी नंबर लेकर जाना होगा।
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- उन्नाव के पायलट प्रोजेक्ट के बाद अब पूरे प्रदेश में नई पंजीयन व्यवस्था लागू होने वाली है। इससे पहले प्रदेश के सभी डीलरों को नई व्यवस्था से रूबरू कराया जा रहा है। डीलर जैसे ही वाहन बेचेंगे। तभी वाहन नंबर जारी हो जाएगा। एचएसआरपी (हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट) भी जारी हो जाएगी। एचएचआरपी लगाने के बाद डीलर फोटो अपलोड करेंगे। तभी वाहन की आरसी जारी होगी। इससे विभिन्न मानवीय गलतियां खत्म होंगी और कोई हेरफेर नहीं कर सकेगा। - जय शंकर तिवारी, उप परिवहन आयुक्त, आगरा परिक्षेत्र।
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- नई पंजीयन व्यवस्था से लोगों को सहूलियत मिलने वाली है। अब लोग किसी भी जनपद में वाहन खरीद सकते हैं। वाहन खरीदने के साथ आरटीओ दफ्तर में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सीधे मूल जनपद का नंबर जारी हो जाएगा। यह एक नेशनल पोर्टल के जरिए प्रक्रिया स्वत: ही पूरी होगी। अब तक एक जिले से वाहन खरीदने पर मूल स्थायी पते वाले जनपद के लिए अस्थायी नंबर जारी होता था। वाहन आरटीओ दफ्तर ले जाते थे, तब नंबर मिलता था। -फरीदउद्दीन, आरटीओ प्रवर्तन।
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