फसलों की सुरक्षा के लिए अनुदान पर मिलने वाली खरपतवार नाशक दवाएं प्राइवेट दुकानों पर बिकवाने के मामले में तत्कालीन जिला कृषि रक्षा अधिकारी राजेश कुमार को क्लीन चिट मिल गई है। उन्हें प्रथमदृष्टया हुई जांच में दोषी पाया गया था। इस मामले में किसान नवाब सिंह की शिकायत पर दोबारा हुई जांच में क्लीन चिट मिल गई है। हालांकि अपर मुख्य सचिव ने अपनी रिपोर्ट में उन्हें परिनिंदा का दंड दिया है। लेकिन राज्यपाल की संस्तुति पर अनुशासनात्मक कार्रवाई समाप्त कर दी है।
मामला वर्ष 2019 का है। उस समय किसानों ने अतरौली में आयोजित तहसील दिवस में तत्कालीन डीएम चंद्रभूषण सिंह से शिकायत की थी कि जिला कृषि रक्षा अधिकारी राजेश कुमार सरकारी अनुदान पर मिलने वाली खरपतवार नाशक दवाएं प्राइवेट दुकानों पर बिकवा रहे हैं। डीएम ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए बीडीओ एवं तत्कालीन जिला कृषि अधिकारी समेत अन्य अफसरों से जांच कराई। जांच में अतरौली कस्बे के विक्रेता के यहां सरकारी दवाएं बरामद हुई। इस मामले में डीएम ने शासन को पत्र लिखकर उनके खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की।
उप कृषि निदेशक यशराज सिंह ने बताया कि जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अधिकारी पर लगाए गए तीनों आरोप जांच में सिद्घ नहीं हो सके हैं। लेकिन उन्हें प्रारंभिक जांच में दोषी पाया गया था। अत: उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई तो समाप्त की जाती है, लेकिन शासकीय दवाओं के दुरुपयोग को बढ़ावा देने के मामले में परिनिंदा प्रविष्टि का दंड दिया गया है।