भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सचिव इकबाल मंद ने भाजपा के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि मुसलमान चार विवाह करते हैं, जिससे मुसलमानों को हिंदुओं की तुलना में तेज दर पर बच्चे पैदा करने की अनुमति मिली हुई है।
उन्होंने कहा कि पुणे में गोखले इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिटिक्स एंड इकोनॉमिक्स की मल्लिका बी मिस्त्री द्वारा किए गए शोध के अनुसार बहुविवाह वास्तव में भारतीय मुसलमानों में उतना व्यापक नहीं है, जितना हिंदुओं में।
सर्वेक्षण में पाया गया कि बहुविवाह की घटनाएं मुसलमानों में सबसे कम हैं। केवल 5.7 फीसदी और हिंदुओं में बहुविवाह की दर 5.8 फीसदी है। हालांकि, बौद्ध व जैन सहित अन्य समुदायों में बहुविवाह आनुपातिक रूप से और भी अधिक हैं। सबसे ऊपर आदिवासी थे, जिनमें से 15.25 फीसदी बहुविवाह था। सरकार के एक सर्वेक्षण में मुसलमानों में बहुविवाह का आंकड़ा 5.6 प्रतिशत और उच्च जाति के हिंदुओं मेे 5.9 प्रतिशत है। जॉन दयाल के सर्वेक्षण से भी यही निष्कर्ष निकाला गया है कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि बहुविवाह का प्रतिशत मुसलमानों में हिंदुओं से अधिक है। इसके बाद के आंकड़े भी इसकी पुष्टि करते हैं।