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पुण्यतिथिः नीरज कहते थे, तुमको लग जाएंगी सदियां हमें भुलाने में

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दीपक शर्मा
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प्रसिद्ध गीतकार व कवि पद्मभूषण गोपालदास नीरज 17 जुलाई 2018 को जब अपनी कार से अलीगढ़ से आगरा के लिए रवाना हुए थे, तब शायद किसी ने नहीं सोचा था कि वह अब कभी लौट कर नहीं आएंगे।
आगरा में ही उनकी तबीयत खराब हुई, जिसके बाद उनको दिल्ली के ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंस ले जाया गया। वहां 19 जुलाई 2018 को शाम 6:30 बजे उन्होंने आखिरी सांस ली। इसके बाद अलीगढ़ में जनकपुरी स्थित आवास पर नीरज का पार्थिव शरीर ही आया। कभी कविता, साहित्य और किस्से कहानियों से गुलजार रहने वाला जनकपुरी स्थित गोपाल दास नीरज का आवास आज वीरान है। यहां के दरो-दीवार आज यही कहते हैं कि... सबूत हैं मेरे घर में ये धुएं के धब्बे, कभी उजालों ने यहां पे खुदकुशी की है। इसके बाद भी जमाने के लिए नीरज को भुलाना आसान नहीं है।
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नीरज अपने शब्दों में अगर यही बात कहें तो वह कहते थे कि-
इतने बदनाम हो गए हैं हम जमाने में
तुमको लग जाएंगी सदियां हमें भुलाने में
चाह कर भी पुण्यतिथि पर बड़ा कार्यक्रम नहीं कर पा रहा : गुंजन
अलीगढ़। पद्म भूषण गोपालदास नीरज के बेटे मिलन प्रभात गुंजन कहते हैं कि महामारी के चलते वह अपने पिता की पुण्यतिथि पर चाह कर भी बड़ा कार्यक्रम नहीं कर पा रहे हैं। हरिद्वार में रह रहे गुंजन कहते हैं कि वे स्वयं अलीगढ़ आकर कार्यक्रम आयोजित करना चाहते थे लेकिन महामारी के चलते बने हालात के कारण यह संभव नहीं हो पा रहा है। वे कहते हैं कि पापा भले ही इस दुनिया में न हों लेकिन उनकी रचनाएं, उनका लेखन सदैव उनके चाहने वालों और साहित्य प्रेमियों की स्मृति में जीवित रहेगा।
मायानगरी रास न आई
नीरज जी अक्सर कहते थे, फिल्मों में उनके गीतों को जबरदस्त सफलता के बाद भी उनको कभी मुंबई (मायानगरी) रास नहीं आई। प्रसिद्ध गजलकार सुरेश कुमार कहते हैं कि उनकी मित्रता देव आनंद, राज कपूर, मनोज कुमार, संगीतकार रोशन, एसडी बर्मन जैसे दिग्गज लोगों से थी। देवानंद अपने अंतिम समय तक नीरज के संपर्क में रहे। देवानंद की पहली निर्देशित फिल्म प्रेम पुजारी से लेकर उनकी आखिरी निर्देशित फिल्म चार्जशीट तक में नीरज ने गाने लिखे। देवानंद ने नीरज को मुंबई आ कर अपने साथ रहने का ऑफर दिया था लेकिन नीरज ने विनम्रता पूर्वक इंकार कर दिया।
फिल्मों में नीरज के लिखे कुछ कालजयी गीत
- शोखियों में घोला जाए फूलों का शबाब - फिल्म प्रेम पुजारी
- फूलों के रंग से दिल की कलम से मैंने लिखी तुझको पाती- फिल्म प्रेम पुजारी
- चूड़ी नहीं ये मेरा दिल है, देखो देखो टूटे ना- फिल्म गैंबलर
- ए भाई जरा देखकर चलो, आगे भी नहीं पीछे भी- फिल्म मेरा नाम जोकर
- मेरा मन तेरा प्यासा, जाने कब पूरी होगी आशा- फिल्म गैंबलर
- जैसे राधा ने माला जपी श्याम की- फिल्म रेशम की डोरी
- खिलते हैं गुल यहां, खिल के बिखरने को- फिल्म शर्मीली
- लिखे जो खत तुझे, वो तेरी याद में- फिल्म कन्यादान
- बस यही अपराध मैं हर बार करता हूं- फिल्म पहचान
- नीरज जी न केवल एक महान कवि थे बल्कि ज्योतिष शास्त्र के विषय में भी उनकी विशेष रुचि थी। आयुर्वेद, यूनानी, प्राकृतिक चिकित्सा से लेकर न्यूमेरोलॉजी तक के जानकार थे। महिलाओं की शिक्षा पर वे विशेष बल देते थे, महिलाओं की शिक्षा के लिए उन्होंने महिला महाविद्यालय की अलीगढ़ में स्थापना की। हमें बेहद गर्व होता है कि हम ऐसे महान व्यक्ति के किराएदार हैं।
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- आनंद प्रताप सिंह, नीरज के मकान में किराएदार।
नीरज जी जब जीवित थे तब अक्सर हमसे हमारी शिक्षा के विषय में पूछा करते थे। वह हमेशा हमको आत्मनिर्भर और जीवन में ऊंचा मुकाम हासिल करने के लिए प्रेरित करते। आज वह नहीं है लेकिन उनका किया गया मार्गदर्शन हमारे साथ है। वह हमें प्रेरित करता है।
- निपुण सिंह और तनिष्ठा शर्मा, नीरज के घर में किराएदार छात्राएं।
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