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अलीगढ़ः पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों ने बिगाड़ा घर-खेती का बजट

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पेट्रोल और डीजल सहित रसोई गैस के बढ़ते दामों ने मध्यम वर्गीय परिवारों से लेकर खेती करने वाले किसानों तक का बजट गड़बड़ा दिया है। आधुनिक दौर में मशीनों से खेती हो रही है, इन मशीनों में से अधिकांश डीजल चलित हैं। ऐसे में खेती कार्य महंगा हो गया है। ट्रैक्टरों से ढुलाई भी महंगी हो गई है। किसानों को अपनी फसल मंडियों तक ले जाने के लिए अधिक मालभाड़ा का भुगतान करना पड़ रहा है। इधर, रसोई गैस और पेट्रोल के दाम बढ़ने से मध्यम वर्गीय परिवार बेहाल हैं। उनके घर का बजट दोगुना हो गया है। लोग कई तरह से कटौती कर जैसे-तैसे घरों का खर्च चला रहे हैं। यह मार ऐसे दौर में पड़ रही है, जब लोग कोरोना काल से अभी तक उभर नहीं पाए हैं।
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डीजल के बढ़ते दाम बड़ी मुसीबत बन गए हैं। खेती ज्यादातर आधुनिक मशीनों से ही हो रही है। कई किसान ऐसे हैं जो पंपसेट पर आश्रित होकर खेती करते हैं। खेतों की जुताई से लेकर खाद की ढुलाई तक महंगी हो चुकी है। किसान चिंतित है कि इतनी महंगी खेती कर लागत खर्च कैसे निकाला जाए। पहले ही कोरोना वायरस की वजह से वे आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। ऊपर से कमरतोड़ महंगाई में इनकी परेशानी को और बढ़ा कर रख दिया। पिछले साल की तुलना में इस बार दस प्रतिशत ज्यादा खर्च खेती पर आ रहा है।
- मुकेश गौड़, किसान
पेट्रोल, डीजल का दाम बढ़ने से माल भाड़े पर सीधा असर पर पड़ा है। इस कारण नमक, दाल से लेकर खाने वाले तेल और अन्य खाद्य सामग्री की कीमत काफी बढ़ी है। आम लोग यह समझ नहीं पा रहे कि आखिर इस महंगाई में बजट को कैसे संतुलित किया जाए। अपने बजट में कटौती करने लगे हैं। पहले जहां किलो में खरीदते थे, वहीं अब आधा किलो में काम चलाने लगे हैं। लोगों को खाना है तो मजबूरी में खरीदना ही पड़ता है।
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- गिरीश राघव, अधिवक्ता
महंगाई चरम पर है। सरकार महंगाई पर अंकुश नहीं लगा पा रही है। गरीब हो या मध्यम वर्ग इस महंगाई से सभी परेशान है। घरेलू उपयोग के वस्तु और किराना सामानों की कीमतें काफी बढ़ गई हैं। सरकार पेट्रोल और डीजल सहित गैस के दामों को नियंत्रित करे। महंगाई बढ़ने से आम आदमी की परेशानी बढ़ रही है। महंगाई पर रोक नहीं लगाई गई तो हालत और भी गंभीर हो जाएंगे। मध्यम वर्गीय परिवार के लिए घर चलाना मुश्किल हो गया है।
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- अदिति जैन, शिक्षिका
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