फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जन प्रतिनिधियों ने तो जनता के साथ ‘खेला’ कर दिया

विज्ञापन
विज्ञापन
जिला पंचायत चुनाव में नवनिर्वाचित सपा, बसपा एवं रालोद के कई सदस्यों ने तो जनता के साथ ‘खेला’ कर दिया। जीत के बाद कई सदस्य जाकर भाजपा की गोद में बैठ गए हैं। सदस्यों का नया चेहरा सामने आने के बाद लोग हैरान और ठगा महसूस कर रहे हैं। प्रबुद्ध लोग तो इसे लोकतंत्र की हत्या बता रहे हैं। महापौर की तरह जिला पंचायत अध्यक्ष एवं प्रखंड प्रमुख का चुनाव भी जनता द्वारा सीधे कराए जाने की मांग भी शुरू हो गई है।
विज्ञापन

जिला पंचायत चुनाव में 47 सदस्य निर्वाचित होकर आए हैं। दलगत आधार पर देखें तो सबसे अधिक 9 सदस्य भाजपा के हैं। जाहिर है कि अध्यक्ष पद की कुर्सी हासिल करने के लिए 24 मत की जरूरत है। 21 निर्दलीय के साथ ही सपा, बसपा, रालोद एवं भीम आर्मी से निर्वाचित 17 सदस्यों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। पिछले 20-22 दिन से सपा, बसपा एवं रालोद के कई सदस्य उत्तराखंड की वादियों के महंगे होटलों में परिवार के साथ शाही खातिरदारी का आनंद ले रहे हैं। ये सभी भाजपा की प्रबल दावेदार के समर्थन में बताए जा रहे हैं। सपा नेता तो सदस्यों के अपहरण का आरोप लगा रहे हैं तो बसपा नेता खरीद-फरोख्त की बात कर रहे हैं। जीत के बाद सदस्यों का रंग बदलने पर सबसे अधिक दुखी मतदाता है।
जिला पंचायत सदस्यों का व्यवहार लोकतंत्र के लिए खतरनाक है। यह उस जनता के साथ धोखा है, जिसने गुप्त मतदान कर उम्मीद से अपने जनप्रतिनिधि का चयन किया। लोभ लालच में जनप्रतिनिधियों के अचानक पलटने से जनता का विश्वास टूट जाता है। इसके दूरगामी एवं खतरनाक परिणाम होते हैं।
विज्ञापन

- डॉ. मुकेश भारद्वाज, पूर्व औटा अध्यक्ष
भाजपा नीति, सुचिता एवं स्वस्थ लोकतंत्र की बात करती है। जिला पंचायत की राजनीति में उनके ही दल के लोग क्या कर रहे हैं, क्या वह नहीं जानते हैं। जनप्रतिनिधियों का व्यवहार तो और ही निंदनीय है। वह लोकतंत्र की हत्या कर रहे हैं। उच्च स्तरीय जांच कर बिकाऊ सदस्यों की सदस्यता समाप्त कर देनी चाहिए।
- रंजन राना, कांग्रेस नेता
महापौर की तरह जिला पंचायत अध्यक्ष एवं प्रखंड प्रमुख का चुनाव भी सीधे जनता द्वारा होनी चाहिए। लोकतंत्र की रक्षा एवं भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए यह जरूरी है। इस संबंध में कानून विशेषज्ञों से राय ले रहा हूं। जल्द ही न्यायालय में जाने पर विचार कर रहा हूं।
विज्ञापन

- मनोज यादव, सपा नेता
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें