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सपा-बसपा से निर्वाचन, भाजपा की गोद में जा बैठे जिपं सदस्य

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उत्तराखंड के नैनीताल के रिसोर्ट में नवनिर्वाचित जिला पंचायत सदस्य - फोटो : CITY OFFICE
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सपा और बसपा से निर्वाचित होने के बाद अधिकतर जिपं सदस्य भाजपा की गोद में जाकर बैठ गए हैं। जिला पंचायत की राजनीति में भारी उलटफेर से विपक्ष चारों खाने चित नजर आ रहा है। उसके अपने ही सदस्य उनके लिए ‘नॉट रिचेबल’ हो गए हैं।
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करीब 30 जिला पंचायत सदस्य और उनके परिवार के 84 लोग उत्तराखंड के नैनीताल एवं आसपास के रिसॉर्ट में प्रकृति का आनंद ले रहे हैं। दो जून से लेकर अब तक करीब तीन बार सदस्यों की जगहों को बदला गया है। जिम कॉर्बेट में भी सदस्यों को ठहराया गया। सपा, बसपा एवं रालोद के नेता सदस्यों को फोन लगा रहे हैं तो उनका फोन रिसीव नहीं हो रहा है। विपक्षी दल के नेताओं को भी अहसास हो गया है कि सदस्य उनके हाथ से निकल गए हैं। दूसरी तरफ भाजपा नेता जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर निर्विरोध निर्वाचन की कोशिश में जुटे हैं। प्रयास है कि अध्यक्ष पद का अन्य कोई प्रत्याशी मैदान में आए ही नहीं।
जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए 26 जून को नामांकन एवं 3 जुलाई को चुनाव है। जनपद में 47 निर्वाचित सदस्य हैं, जिसमें से एक महिला सदस्य भूमिगत हैं। उनके पति शराब कांड के मुख्य अभियुक्त है। अध्यक्ष पद हासिल करने के लिए किसी भी दल को 24 सदस्यों की जरूरत है। स्पष्ट बहुमत किसी के पास नहीं है। सबसे अधिक 9 सदस्य भाजपा के पास है। 21 निर्दलीय सदस्यों की भूमिका अहम है। भाजपा नेता 40 सदस्यों का दावा कर रहे हैं और पार्टी प्रत्याशी विजय सिंह का जीत तय मान रहे हैं। भाजपा नेताओं के अनुसार सपा, बसपा और रालोद के अधिकतर सदस्य उनके साथ हैं। अधिकतर निर्दलीय सदस्यों का समर्थन होने का भी दावा कर रहे हैं।
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सुधीर चौधरी के पीछे हटने के बाद बदली तस्वीर
जिला पंचायत की राजनीति के दिग्गज खिलाड़ी ठाकुर जयवीर सिंह के फार्म हाउस पर पहली जून को गोपनीय बैठक हुई थी। उसमें जयवीर सिंह के साथ राजू भैया, ठाकुर श्योराज सिंह एवं भाजपा जिलाध्यक्ष चौधरी ऋषिपाल सिंह के साथ ही सुधीर सिंह भी शामिल हुए थे। यह अलग बात है कि सुधीर सिंह उस समय बैठक में शामिल होने से इंकार कर रहे थे। इस बैठक के बाद से जिला पंचायत की राजनीति गर्मा गई थी। नवनिर्वाचित सदस्यों को बीवी/पति-बच्चों के साथ गुप्त स्थानों पर भेज दिया गया ताकि कोई हाईजैक न कर सके। सबसे पहले निर्दलीय, सपा, बसपा एवं रालोद सदस्यों को भेजा गया। उसके बाद भाजपा के भी सदस्यों को भेजा गया। भाजपा के कुछ सदस्य अभी भी जनपद में है।
रिसोर्ट से बाहर नहीं जा रहे सदस्य
परिवार के साथ प्रकृति का आनंद ले रहे जिला पंचायत सदस्य रिसोर्ट से बाहर नहीं जा रहे है। कुछ सदस्यों से फोन पर बातचीत हुई। उनका कहना है कि कमरे में फोन पर बात करने की मनाही नहीं है। बाहर फोन लेकर नहीं जाना है। एक सदस्य ने फोन पर बताया कि अध्यक्ष पद पर समर्थन देने के लिए सभी की अपनी-अपनी प्राथमिकता है। कुछ लोग ऐसे हैं, जो क्षेत्र के विकास की प्राथमिकता की शर्त पर समर्थन दे रहे हैं। कुछ लोगों की दूसरी प्राथमिकता है।
लखनऊ को भी देना है संदेश
समधन विजय सिंह को जिला पंचायत अध्यक्ष पद की कुर्सी पर बैठाने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के पुत्र एवं एटा सांसद राजवीर सिंह राजू भैया काफी प्रयास कर रहे हैं। कुछ रोज पहले करीब 80 प्रतिशत से अधिक नवनिर्वाचित सदस्यों का प्रमाण पत्र लखनऊ पहुंचा दिया गया है ताकि किसी को किसी तरह का संदेह नहीं रहे। विधानसभा चुनाव निकट देखकर शीर्ष नेतृत्व भी जोखिम लेने के पक्ष में नहीं है। एक-दो दिन में विजय सिंह को अधिकारिक रूप से जिला पंचायत अध्यक्ष पद की प्रत्याशी घोषित किए जाने की उम्मीद है।
कोई भी व्यक्ति परिवार के साथ घूमने जा सकता है। हमारी स्थिति तो पहले से ही मजबूत है। 40 सदस्य हमारे साथ है। किसी सदस्य को घेर कर रखने की जरूरत ही नहीं है। हमारे सामने लड़ने की स्थिति में कोई नहीं है।
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- चौधरी ऋषिपाल सिंह, जिलाध्यक्ष, भाजपा
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