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जानलेवा शराब : कोरोना काल में जांच पड़ी सुस्त, पंचायत चुनाव ने भी डाला असर

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शराब की दुकानें खुलने के वक्त हर वर्ष अप्रैल में लगातार शिकायतें होती हैं। जिसमें स्कूलों, अस्पतालों और धार्मिक स्थलों के पास ठेका खुलने की समस्या प्रमुख होती है। इसके अलावा तस्करी की शराब, मिलावटी शराब, कच्ची शराब, दुकानों पर ठेकेदारों और सेल्समैन की मनमानी, ओवररेटिंग की शिकायतें रहती हैं। इस बार कोविड-19 सेस के नाम पर लोगों ने ओवररेटिंग की थी, हालांकि ये सेस वर्ष 2020 से ही लागू था। अधिकांश शिकायतों की मानीटरिंग खुद जिला आबकारी अधिकारी धीरज शर्मा करते रहे। इनमें से कई शिकायतें सीएम के पोर्टल से उनके पास आती रहीं। उन पर समयबद्ध जांच और जवाब दिए गए। कुछ में मौके पर कार्रवाई भी हुई।
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इस बीच अप्रैल में कोरोना की दूसरी तेज लहर में आबकारी विभाग भी चपेट में आया। इसके साथ ही अधिकारियों-कर्मियों की पंचायत चुनाव में भी ड्यूटी लगी। एक तरफ विभागीय स्टाफ कम होता गया तो उधर पंचायत चुनाव में सस्ती शराब की खपत बढ़ गई। बांटने के लिए इधर-उधर से भी शराब मंगवाई जाने लगी। इसके बाद भी विभागीय स्तर पर शिकायतों की जांच होती रही, लेकिन कई मामलों में मौके पर सत्यापन नहीं हुआ। शुक्रवार की घटना इसका नतीजा है। अगर मौके पर भी जांच होती तो ये नौबत नहीं आती।
अलीगढ़ में पूर्व में भी कई बार देशी शराब को पैक करने, दूसरे प्रांत की शराब बेचने, हरियाणा से तस्करी की शराब लाने के दर्जनों मामले पकड़े जा चुके हैं। संभवत: ये पहला मौका है जब सरकारी स्तर से आवंटित ठेकों में बिकने वाली शराब पर सवाल उठ रहे हैं। घटनास्थल से मिली शराब की उन खाली बोतलों की जांच भी हो रही है, जिसमें कुछ मात्रा शेष रह गई है। जांच इस बात की भी है कि कहीं कोई और सरकारी ब्रांड की पैकिंग निजी स्तर पर तो नहीं कर रहा है। जिससे बड़ी कर चोरी कर लोग लाखों कमा रहे हों। इसलिए जो भी मौके से मिला है, वह सब जांच के दायरे में है। प्रशासनिक स्तर से हो रही जांच में मौके पर जो खाली बोतलें मिली हैं, उन पर बार कोड नहीं पाया गया है। दुकानों और गोदामों के स्टाक का बार कोड मिलवाया गया है, वो पूरा माल सही है। ऐसे में इस बात के संकेत मिले हैं कि कुछ सरकारी ठेकों पर निजी स्तर से तैयार शराब बेची जा रही थी, इसलिए उनका बार कोड नहीं मिल रहा है।
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ट्रेटा पैक में भी मिलावट.. ?
अलीगढ़। शराब के कारोबार में आमतौर पर ट्रेटा पैक को सबसे सुरक्षित माना जाता है, क्योंकि इसमें कुछ मिलाते ही पैकिंग लीक हो जाएगी। शुक्रवार की घटना में बार्डर नाम की देशी शराब का ट्रेटा पैक भी सवालों के घेरे में है। इसमें कैसे मिलावट हुई या इसका डुप्लीकेट कैसे तैयार हुआ..? प्रशासनिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ स्पष्ट होगा।
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