प्रशासन की तमाम सख्ती और कार्रवाई के बाद भी कुछ निजी नर्सिंग होम द्वारा संक्रमण ग्रस्त मरीजों से निर्धारित दर से अधिक वसूली रुक नहीं रही है।
इस संबंध में कांग्रेस नेता गजेंद्र सिंह ने दो पीड़ित मरीजों के तीमारदारों के मामलों का उल्लेख करते हुए इसकी शिकायत अपर निदेशक स्वास्थ्य से की है। पत्र में कहा गया है कि ऐसे नर्सिंग होम संचालकों ने प्रशासन द्वारा निर्धारित की गई नियमावली का पालन करने का फरेब दिखाते हुए मरीज के लिए खर्चे के ऐसे ऐसे मद तैयार कर दिए हैं, जिनका तीमारदारों को अंदाजा ही नहीं होता। जिन मामलों की शिकायत की गई है उनमें मरीज घर पर तो आ गए हैं, लेकिन अस्पताल में मरीज के इलाज के साथ-साथ तीमारदारों का उत्पीड़न भी हुआ।
केस नंबर 1
सासनी गेट क्षेत्र के एक मामले का उल्लेख करते हुए पत्र में कहा गया है कि संक्रमण ग्रस्त होने के बाद मरीज को रामघाट रोड स्थित एक नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था। उस समय 20000 रुपये अस्पताल प्रशासन द्वारा ले लिए गए। मरीज के तीमारदारों से कहा गया कि मरीज को घर का बना खाना न दें। नर्सिंग होम मरीज के खाने की व्यवस्था करेगा। तीमारदारों का विचार था कि नर्सिंग होम द्वारा यह व्यवस्था मरीज की निगरानी और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए की जा रही है, लेकिन मरीज को डिस्चार्ज कर आते समय 10000 रुपये का बिल खाने का बना दिया गया। इसके अलावा 5000 रुपये छोटे-छोटे अन्य मदों के जोड़ दिए गए। बिना पैसा दिए वह मरीज को छोड़ने के लिए तैयार नहीं थे।
केस नंबर 2
थाना गांधी पार्क क्षेत्र में जीटी रोड स्थित एक नर्सिंग होम में संक्रमण ग्रस्त होने के बाद मरीज को भर्ती कराया गया। भर्ती के समय अस्पताल प्रशासन को प्रशासन द्वारा ऐसे मरीजों के संबंध में जारी दिशा निर्देशों का भी हवाला दिया गया। मरीज के अस्पताल से डिस्चार्ज होने के समय 5000 रुपये का बिल मरीज के कमरे में लगे एलईडी टीवी का दिखाया गया। इसे वसूलने के लिए पूरा अस्पताल का स्टाफ इकट्ठा हो गया। पैसे न देने पर स्टाफ अभद्रता करने को तैयार था। तीमारदार पैसे देकर किसी तरह मरीज को घर पर लेकर आए।