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सहालग चौपट होने से नहीं छप रही विवाह की पाती

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कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रकोप के चलते सहालग चौपट हो गए हैं। ऐसे में शादी-विवाह से जुड़े दर्जनों कारोबारों का बैंड बज चुका है। एक शादी से अमूमन कई तरह के कारोबार जुड़े रहते हैं। इनमें से विवाह की पाती (शादी कार्ड) छापने वाले कारोबारियों के सामने भी रोजी रोटी का संकट है। आर्थिक समस्याएं इतनी बढ़ गई हैं कि अब तो कहा जाने लगा है कि इस साल कार्ड ही नहीं छप पाएंगे।
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शादी विवाह की पाती छापने वाले क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि अब विवाह में संख्या 25 कर दी गई है। जिसमें दो शादी वाले परिवार होते हैं। इन्हें मिलाकर ही संख्या 25 हो जाती है। इसीलिए परिजनों और रिश्तेदारों को बांटने के लिए लोग कार्ड छपवा ही नहीं रहे हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से डिजिटली कार्ड भेजने की परंपरा ने रफ्तार पकड़ी है। शादी के कार्ड छापने के लिए शहर में तकरीबन 50 प्रतिष्ठान सेवाएं देते हैं। जबकि कुछ बड़े होलसेल विक्रेता भी हैं, जहां से कार्ड लेकर छपवाए जाते हैं। डिजाइनिंग ऑपरेटर से लेकर स्क्रीन प्रिंटिंग मजदूर तक का परिवार के सामने धंधा बंद होने से कई समस्याएं भी उभरकर आ रही हैं। कारोबारियों के अनुमान के मुताबिक हर साल जिले में तकरीबन 25 करोड़ रुपये का कारोबार होता है। जिसमें जुड़े लोगों की संख्या हजारों में है।
शादी के कार्ड छपना बंद हो गए हैं। 25 से 30 लाख रुपये का स्टॉक रखा हुआ है। चूंकि यह स्टॉक लोन लेकर खरीदा था। ऐसे में इसकी आने वाली ब्याज को चुका नहीं पा रहे हैं। जबकि कामधंधा बंद पड़ा हुआ है। वहीं अगर नवंबर-दिसंबर में शादियां हो तो भी नहीं लगता कि लोग कार्ड छपवाएंगे। क्योंकि आजकल सोशल मीडिया पर डिजिटल कार्ड भेजने का चलन बढ़ गया है।
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- शुभम अग्रवाल, मीरा प्रिंटिंग प्रेस
एक दिन में तकरीबन पांच हजार कार्ड छाप देते थे। 120 रुपये सैकड़ा के हिसाब से छपाई की मजदूरी मिलती थी। अब पांच हजार में से पांच कार्ड भी छपने के लिए नहीं आ रहे हैं। परिवार के सामने आर्थिक समस्या खड़ी हो गई है। परिवार में नौ लोग हैं, जिसमें से दो भाई कमाने वाले हैं। आज दोनों भाई घर पर खाली बैठे हुए हैं।
-संजीव शर्मा, वर्षा स्क्त्रस्ीन आर्ट, वेगमबाग
शादी के कार्डों का बमुश्किल 25 प्रतिशत ही काम रह गया है। इस कारोबार से बहुत लोग जुड़े होते हैं। शहर में सैकड़ों डिजाइनर, छपाई वाले, फोल्ड करने से लेकर छपाई वालों तक के मजदूर परिवारों का पेट भी शादी के कार्डों के व्यापार पर ही पलता है। कोरोना कर्फ्यू खुले तो भी नहीं लगता की कार्ड छपेंगे। क्योंकि संख्या सीमित है। 100 लोगों की अनुमति मिले तो तकरीबन 25 परिवार ही शामिल हो पाएंगे। जिन्हें संदेश के माध्यम से ही बुलाया जा रहा है।
- श्रीधर आर्य, शिवाजी मुद्रालय
शादी-विवाह भारत में बहुत से रोजगारों का समारोह है। भव्यता से शादी करने की परंपरा काफी पुरानी रही है। साल 2020 में मार्च से लेकर जुलाई तक सहालग पिट गया। इस बार भी वही हालात हैं। अब तो लगता है कि जाड़ों में आने वाले सहालग में भी धंधा मंदा ही रहेगा। पूरे कारोबार को करोड़ों का नुकसान है।
- मनोज कुमार अग्रवाल, नवीन प्रेस, मामू भांजा
शादी के कार्ड हो या अन्य प्रिटिंग का कार्य। सभी बंद चल रहा है। काम धंधा नहीं है तो किसी भी प्रकार की अब आय नहीं है। खाली हाथ बैठे हुए हैं। इस क्षेत्र से जुड़े व्यापारी ही नहीं, बल्कि मजदूरों तक के सामने समस्या खड़ी हो गई है।
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- राहुल वार्ष्णेय, वार्ष्णेय प्रिटंर्स एंड सप्लायर्स
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