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हार्डवेयर को धातुओं के ‘मुलायम’ होने का इंतजार

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आशीष निगम
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ताले के साथ हार्डवेयर उद्योग को भी धातुओं के ‘मुलायम’ होने का बेसब्री से इंतजार है। जब एक बार फिर पीतल से बनने वाला मनमोहक हार्डवेयर पूरे देश में ‘सोना’ बन कर चमकेगा। जानकारों की मानें तो दीपावली तक बाजार में बहुत ज्यादा सुधार की उम्मीद नहीं है, क्योंकि अगर कोरोना की तीसरी संभावित लहर फैली तो दो तीन महीने का समय ऐसे ही कोरोना कर्फ्यू की भेंट चढ़ जाएगा और ये इंतजार और लंबा हो सकता है। व्यापारियों ने मांग की है कि केंद्र और राज्य सरकार कोरोना की दूसरी लहर को थमाने में जिस तरह से अभी सक्रिय हुए हैं।
उसी तरह से तीसरी संभावित लहर को आने से पहले से रोका जाए। इससे कारोबार को भी बड़े झटके से बचाया जा सकेगा। इसके अलावा ताला, हार्डवेयर और मूर्ति उद्योग को उबारने के लिए कच्चे माल के बढ़ते हुए भाव पर लगाम लगाई जाए। इनके भाव अगर नहीं रोके गए तो कई कारखाने हमेशा के लिए बंद हो जाएंगे, जिससे हजारों लोग बेरोजगार हो जाएंगे। व्यापारियों ने ये भी सवाल उठाया है कि जब चीन धातुओं का विशाल भंडार जमा कर रहा था तो हमारे देश के नीति निर्माता और बड़े उद्योगपति क्या कर रहे थे..? स्वदेशी उद्योगों के लिए कच्ची धातुओं की उपलब्धता के वास्ते बड़े स्तर पर भंडारण क्यों नहीं किया गया।
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समस्याएं-
व्यापारी बोले..सरकार की कल्स्टर योजनाएं व्यवहारिक नहीं हैं
लॉकडाउन में आधा देश, मांग ही नहीं तो भंडारण क्यों होगा
एक साल से वैश्विक स्तर पर कच्चे माल का रेट बढ़ता जा रहा
समाधान-
कच्चे माल के रेट कम हों, कारखानों के काम रोका टोकी न हो
बिजली के बिल, टैक्स और व्यवसायिक बैंक लोन में राहत मिले
कच्चे माल की उपलब्धता को लेकर कोई ठोस नीति बनाने की जरूरत
कारखानों में आए दिन जरूरत का सामान चाहिए होता है, लेकिन दिल्ली के थोक बाजारों में बंदी से कोई चीज नहीं मिल रही है। कच्चा माल बहुत मंहगा है। लेबर को घर से कारखाने पहुंचने में दिक्कत है। बाजार में मांग बहुत कम है। ऐसे में माल का भंडारण कहां तक हो सकता है। अगर जल्द ही कच्चे माल के भाव स्थिर नहीं किए गए, कोरोना संक्रमण को रोका नहीं गया तो हालात और बदतर हो जाएंगे। केंद्र और राज्य सरकारों को कोरोना को रोकने के साथ ही उद्योगों को बचाने के लिए काम करना चाहिए। अगर अभी नहीं चेते तो बहुत देर हो जाएगी।
- नीरज अग्रवाल, एमडी डीनीमा ओवरसीज
केंद्र और राज्य सरकार की ओर से लागू कल्स्टर योजनाएं व्यावहारिक नहीं हैं। व्यापारी अपना निजी काम छोड़ कर कल्स्टर में क्यों मेहनत करेंगे। ये योजनाएं यूनिटवार बनें तो यकीनन इनका लाभ होगा। अन्यथा ऐेसे ड्रामे करना बंद कर देना चाहिए। लोगों ने कोरोना संक्रमण को गंभीरता से नहीं लिया इसलिए ये समस्या आ रही है। गाजियाबाद और फरीदाबाद की फर्मों ने माल की कमी को देखते हुए लोहे की शीट 62 रुपये किलो से बढ़ा कर 80 रुपये कर दी है। ऐसे में कच्चा माल बना कर कहां बेचा जाएगा। जबकि आर्डर पुराने रेटों पर बुक हो चुका है। पुराने आर्डर पर सस्ता माल देकर वादा पूरा करेंगे, लेकिन नए आर्डर नये रेट पर बुक नहीं हो रहे तो माल कैसे बनेगा।
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-पीएस चौहान, प्रोपराइटर मैरीगोल्ड डोर्स किंग
कच्चे माल के रेट बहुत बढ़ने और अधिकांश हिस्सों में लॉकडाउन के कारण बाजार बंद होने से माल की मांग नहीं है। ऐसे में एक महीने में कोई नया आर्डर नहीं मिला है। अब बाजार की हालत कब तक सुधरेगी कहना मुश्किल है। अगर कोरोना जारी रहा तो यकीन मानिए आधे से ज्यादा कारखाने बंद हो जाएंगे। सरकार बिजली के बिलों में उद्यमियों को राहत दे। टैक्स अदायगी में छूट और समय दिया जाए। हार्डवेयर और ताला उद्योग बहुत बड़े संकट से जूझ रहा है।
-अरुणेश अग्रवाल
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