पेड़ों से गिरे सूखे पत्ते, छाल, फलों को आपने यूं ही सड़क पर पड़े देखा होगा, लेकिन अब यही सूखे पत्ते, फल, छाल शोकेस में सजे नजर आ रहे हैं। लोग इन पर नाम, पता लिखवाकर बतौर विजिटिंग कार्ड भी इस्तेमाल कर रहे हैं। ये सब किया है अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के संगीत शिक्षक जॉनी फॉस्टर ने। रंग और कलम की जुगलबंदी से जॉनी फॉस्टर इन बेकार सूखे पत्तों, फलों व छालों को खास बना रहे हैं, उनकी इस नायाब दस्तकारी को लोग बेहद पसंद कर रहे हैं।
एएमयू कैंपस में सैकड़ों दरख्त हैं, जब इन दरख्तों से पत्ते, छाल व फल सूखकर या पककर जमीन पर गिर जाते हैं, तो संगीतकार व शायर जॉनी फॉस्टर इन्हें सहेजना शुरू कर देते हैं। इनमें हल्का रंग भर व कलम की मदद से शेर, गजल लिखकर उसे सांस्कृतिक रूप में ढाल देते हैं। सूखे फल, छाल से बना एश ट्रे और पत्तों की छाल पर लिखे अपने गीत, गजल को अलीगढ़ समेत दोहा, कतर, कुवैत, दुबई, अमेरिका, मॉरीशस आदि देशों में मित्रों को भेंट कर चुके हैं। जॉनी फॉस्टर ने बताया कि सूखे पत्ते पर नाम, पता लिखकर उसे बतौर विजिटिंग कार्ड भी इस्तेमाल करते हैं। उपहार पाने वाले दोस्तों ने इस कुदरती तोहफे को बहुत पसंद किया है।
सूखे फल छाल बनी वस्तु को भेंट करते संगीतकार जॉनी फास्टर- फोटो : CITY OFFICE