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कोविड हेल्प डेस्क को ही हेल्प की दरकार

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विकास भवन गेट पर नहीं मिली कोविड हेल्प डेस्क। - फोटो : CITY OFFICE
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कोरोना काल में लोगों को मास्क, सैनिटाइजर और दो गज की दूरी बनाए रखने के नियम का पालन कराया जा रहा है। मगर, सरकारी कार्यालयों में ही ये नियम टूट रहे हैं। कोविड हेल्प डेस्क भी नाम की रह गई है। न तो वहां कर्मचारी तैनात हैं और न ही व्यवस्था को बनाए रखने के लिए मॉनिटरिंग की जा रही है। यह सब तब हो रहा है, जब देश में कोरोना की दूसरी लहर आने की चिंता जताई जा रही है। बीते दिनों जिले में भी बड़ी संख्या में कोरोना संक्रमित मिले थे। इसके बावजूद सरकारी दफ्तरों में सतर्कता नहीं बरती जा रही है।
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पूर्व में जिन कार्यालयों में कोविड हेल्प डेस्क की स्थापना की गई थी, उनमें से कई जगहों पर इनका नामों-निशान तक नहीं है। लाखों रुपये इनकी स्थापना पर खर्च हुए थे। सैनिटाइजेशन के लिए मशीनों की व्यवस्था की गई। अब इनमें सैनिटाइजर ही नहीं भरा जाता है। यह आलम तब है जब कोरोना की दूसरी लहर दस्तक दे रही है।
हाल-ए-कोविड हेल्प डेस्क
- जिला पंचायत कार्यालय में कोविड हेल्प डेस्क ही नहीं मिली।
- विकास भवन में कोविड हेल्प डेस्क नहीं है।
- एडीए कार्यालय में कोविड हेल्प डेस्क नहीं है।
- नगर निगम कार्यालय में कोविड हेल्प डेस्क हीं नहीं मिली।
- डीएम कार्यालय पर कोविड जांच की व्यवस्था पाई गई।
- एसएसपी कार्यालय पर कोविड हेल्प डेस्क बनी मिली।
- गांधी पार्क बस अड्डे पर कोविड हेल्प डेस्क के नाम पर एक टेबल रखी थी, जिस पर कोई कर्मचारी नहीं मिला।
- आरटीओ कार्यालय में कोविड हेल्प डेस्क नहीं मिली, यहां पुरानी बिल्डिंग में लगी सैनिटाइजर मशीन भी खराब हालात में मिली।
- रेलवे स्टेशन के निकास द्वार पर कोविड की जांच के लिए टीम मिली। वहीं, प्रवेश द्वार पर थर्मल स्क्त्रस्ीनिंग की व्यवस्था मिली।
जिन सरकारी कार्यालयों में कोविड हेल्प डेस्क का संचालन नियमित तौर पर नहीं किया जा रहा है, उनके अध्यक्षों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण तलब किया जाएगा। कोरोना की दूसरी लहर से लोगों को बचाना ही प्रशासन की प्राथमिकता है।
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-चंद्रभूषण सिंह, जिलाधिकारी
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