मथुरा-आगरा हाईवे पर फरह के मकदूमनगर स्थित केंद्रीय बकरी अनुसंधान केंद्र (सीआईआरजी यानी सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च आन गोटस) यहां से महज नब्बे किलोमीटर दूर है। जहां देश के दूरदराज इलाकों से युवा बकरी पालन का 15 दिनी प्रशिक्षण लेने पहुंचते हैं। इसके बावजूद सरकारी दस्तावेजों में अलीगढ़ में एक भी बकरी फार्म दर्ज नहीं है। वो भी तब, जब बकरी का दूध गाय और भैंस से कई गुना महंगा बिक रहा है और इसकी बीट से बनने वाली केंचुआ खाद 40 रुपये किलो में है।
बकरी पालन की इन खूबियों को समझने के बाद दिल्ली में सिस्टम इंजीनियर की नौकरी छोड़ कर आए मीर हसन ने पांच महीने पहले रियाज कॉलोनी बरौली बाईपास रोड पर अपना बकरी फार्म खोला है। जहां उन्होंने बरबरी प्रजाति की बकरी पालना शुरू किया है और वह खाद भी बना रहे हैं। एक दिन में बरबरी एक लीटर दूध देती है। उनके फार्म में 16 बकरियां एक बकरा है। हाल ही में चार बच्चे हुए हैं। सात आठ बकरियां जल्द ही बच्चे देंगी। फार्म में एक कमरे में दो सेक्शन और बाहर का शेड है। पूरा फार्म चालू करने में चार लाख का खर्च आया।
मथुरा से प्रशिक्षण प्राप्त मीर हसन कहते हैं कि सर्दी खत्म होने के बाद वह बीटल प्रजाति की दूसरी बकरी लाने की तैयारी में हैं, जो दिन में लगभग दो लीटर तक दूध देती है। बरबरी बच्चे देने और बीटल दूध देने में बेहतर है। इनका पालन बहुत सरल, कम खर्चीला और आसान है। तीन टीके (1-पीपीआर 2-एफएमडी 3-ईटी) लगवाने के बाद इनको कई बीमारियों से बचाया जा सकता है। हसन ने बताया कि बकरी की बीट में एशियाना फेटेडा नाम की केंचुआ प्रजाति डाल कर वह बहुत तेजी से वर्मीकम्पोजट खाद बनाते हैं। जिसकी कीमत लगभग 40 रुपये किलो है। अब वह अपना काम बढ़ाने के लिए प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करा रहे हैं। डेंगू का प्रकोप बढ़ने पर बकरी का दूध 250 से 300 रुपये लीटर तक बिक जाना आम बात हो गई है। टीबी के रोगियों के लिए भी ये दवा से कम नहीं है।
बहरहाल, ऐसा नहीं है कि जिले में बकरी पालन रसातल में पहुंच गया हो। वर्ष 2012 की पशुगणना के अनुसार जनपद में बकरा बकरी की संख्या 173119 के आसपास थी। वर्ष 2019 की गणना का डाटा अब तक पशुपालन विभाग के पास नहीं आया है। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. बीपी सिंह कहते हैं कि उनके पास किसी बकरी फार्म का कोई आधिकारिक ब्योरा उपलब्ध नहीं है। अनुमान के मुताबिक बकरी पालन करने वालों की तादाद हजारों में है, वर्तमान में बकरी की संख्या जिले में लगभग दो लाख के आसपास है। जिले में बरबरी, जमुनापारी, बीटल प्रजाति बहुतायत में हैं। जिनकी प्रति बकरी कीमत लगभग 10 से 12 हजार रुपये है। खैर, तकनीकी रूप से देखा जाए तो वर्तमान में एक भी बड़ा बकरी फार्म नहीं है, जिसे देख समझ कर दूसरे युवा इस कारोबार की ओर बढ़ें, लेकिन मीर हसन जैसे जुझारू युवा इसको बड़े रोजगार में बदलने में जुटे हैं।