प्रो. अशोक मित्तल, कुलपति डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा।
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा फर्जीवाड़े से जूझ रहा था। फर्जी मार्कशीट, फर्जी डिग्री तक जारी की गईं। यह क्रम रुकने का नाम नहीं ले रहा था। हर तरफ आगरा विवि की छवि खराब हो रही थी। लेकिन जब कुलपति का पदभार ग्रहण किया तो इस पर काम करना प्रारंभ किया। धीरे-धीरे फर्जीवाड़ा करने वालों की जड़ों को काटने में लगा हूं। मैं भी चाहता हूं कि विवि या इससे जुड़े कालेजों के किसी भी छात्र छात्रा को भटकना न पड़े। इसीलिए लाखों डिग्रियों को वेरीफिकेशन के लिए भेजा है। ये बातें डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अशोक मित्तल ने अलीगढ़ दौरे पर अमर उजाला से बातचीत में कहीं।
वह श्री टीकाराम कन्या महाविद्यालय के 84वें संस्थापक दिवस और महाविद्यालय के स्थापना दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए थे। उन्होंने कहा, शिक्षकों से लेकर विद्यार्थियों की समस्या का निदान चाहता हूं। इसी वजह से शिक्षकों से लगातार संपर्क में रहता हूं। वहीं जो भी विद्यार्थी मुझसे मिलने आते हैं। मेरा प्रयास रहता है कि एक ही बार में उसका कार्य हो जाए। जिससे वह बार बार विवि आने को मजबूर न हो।
इसके लिए व्यापक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। विगत महीनों में जब संज्ञान में आया कि लाखों प्रिंटेड डिग्रियां पटलों पर रखी हैं तो इनको वेरीफिकेशन के लिए भेजा है। साथ ही इसकी जांच भी कराई जा रही है। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। प्राथमिकता में छात्र छात्राओं की समस्या खत्म करना है। विश्वविद्यालय में सालों से फर्जीवाड़ा चल रहा था। ऐसे में पुरानी मानसिकता ही चली आ रही थी। जबकि आज का दौर बदल रहा है। भ्रष्टाचार मिटाने के लिए सरकार भी प्रतिबद्ध है। विद्यार्थियों को मार्कशीट और डिग्री घर बैठे मिल जाए, मैं यह करके रहूंगा। भले ही समय लग जाए। लेकिन इससे आने वाली पीढ़ी को लाभ मिलेगा।
लगाने पड़ रहे चक्कर तो विद्यार्थियों को खर्चा दे विवि : औटा अध्यक्ष
डॉ. भीमराव आंबेडकर विवि शिक्षक संघ (औटा) के नवनिर्वाचित अध्यक्ष डॉ. ओमवीर सिंह ने छात्र छात्राओं की समस्या पर के बारे में कहा कि इसमें विवि का ही दोष है। छात्र छात्राएं किसी भी प्रकार से दोषी नहीं हैं। विद्यार्थियों की मार्कशीट और डिग्री जारी नहीं हो रही हैं। इसके लिए छात्रों विवि के चक्कर काटने पड़ रहे हैं तो प्रत्येक चक्कर में आ रहे खर्चे का भुगतान किया जाए। जिससे विद्यार्थियों का समय और पैसा व्यर्थ में खर्च न हो। उन्होंने कहा कि लाखों डिग्रियां पटलों पर ही लंबित हैं। इसकी जांच कराकर दोषी को सजा दी जाए। लेकिन तब तक कालेजों से डाटा मंगाकर तत्काल छात्र के मांगने पर डिग्री और मार्कशीट जारी की जाए, क्योंकि दस्तावेजों के अभाव में विद्यार्थी अपना भविष्य तक तय नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में देश की प्रगति में आगरा विवि के सैकड़ों छात्र छात्राओं की डिग्री रोड़ा बनी हुई है।