स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर महिलाओं को रोजगार देने की दिशा में काम कर रहे जिलाधिकारी ने एक और नायाब पहल की है। अब जिले में नुमाइश मैदान से लेकर मंडी, ब्लॉक कार्यालयों और तहसीलों में 25 ऐसे केंद्र खोले जाएंगे, जहां स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा बनाई जा रहीं, दैनिक उपयोग की वस्तुओं की बिक्री की जा सके। इन वस्तुओं की पैकेजिंग, ब्रांडिंग का जिम्मा डीसी एनआरएलएम को सौंपा गया है। वह महिला समूहों को पैकेजिंग और ब्रांडिंग मैनेजमेंट के गुर सिखाएंगे। सोशल मीडिया पर ब्रांडिंग करना मुख्य उद्देश्य रहेगा।
जिलाधिकारी चंद्रभूषण सिंह ने बताया कि जिले में कई स्वयं सहायता समूहों द्वारा कपड़े, जूते, घरेलू उपयोग की वस्तुएं, जैविक खेती, आचार आदि उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। अभी तक समूह अपने उत्पादों को बाजार में जाकर दुकानदारों को बेचते थे, जिसकी एवज में उनको उतना लाभ नहीं मिल पाता, जितने की वह हकदार है। इसलिए अब इन समूहों के खुद के बिक्री केंद्र खुलवाने का फैसला जिला प्रशासन ने लिया है। प्रथम चरण में 25 समूहों के नुमाइश मैदान, मंडी, ब्लाक कार्यालयों में बिक्री केंद्र खुलवाने का निर्णय लिया गया है। दूसरे चरण में समूहों और बिक्री केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाएगी। इसका पूरा प्रारूप तैयार कर शासन को भेजा गया है।
साथ ही शासन से अनुरोध किया है कि वह अलीगढ़ के इस रोजगार मॉडल को अपनाकर पूरे प्रदेश में इसे लागू कराए। कोरोना काल में जिस प्रकार से रोजगार का संकट पैदा हुआ है, उससे उबरने में यह मॉडल बहुत हद तक कारगर साबित होगा। इससे पहले समूहों को राशन की दुकान खुलवाने और हर सरकारी कार्यालय में प्रेरणा कैंटीन खुलवाने का निर्णय भी अलीगढ़ प्रशासन ने ही लिया था, जिसे मुख्यमंत्री से पूरे प्रदेश में लागू कराया है।