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अलीगढ़ः बिना चिकित्सक अतरौली का 100 शैय्या युक्त संयुक्त चिकित्सालय

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अतरौली स्थित 100 शैय्या युक्त संयुक्त चिकित्सालय का गेट दोपहर 3 बजे हुआ बंद । - फोटो : CITY OFFICE
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कौशल कुमार ओझा
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अतरौली स्थित 100 शैय्या युक्त संयुक्त चिकित्सालय बिना चिकित्सकों के संचालित हो रहा है। बिना स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ के गर्भवती महिलाओं का प्रसव कराया जा रहा है। सर्जन के अभाव में ऑपरेशन नहीं हो रहे हैं। चिकित्सालय केवल इमरजेंसी रेफर सेंटर बन कर रह गया है।
चुनावी सभाओं में बड़ी-बड़ी बातें होती हैं। जमीनी हकीकत कुछ और है। खासकर सरकारी अस्पतालों की तो हालत बहुत दयनीय है। अतरौली के 100 शैय्या युक्त संयुक्त चिकित्सालय में पुरुष एवं महिला इकाई में 25 डॉक्टरों के पद सृजित हैं। सच्चाई जानकर आप हैरान रह जाएंगे। सीएमएस को छोड़कर एक भी चिकित्सक चिकित्सालय में नहीं है। तीन चिकित्सक यहां अटैच्ड हैं। अटैच्ड चिकित्सक में एक आंख एवं दूसरे दंत चिकित्सक हैं। तीसरे एमओ हैं। एक बाल रोग विशेषज्ञ चंद रोज पहले आए हैं।
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पानी की तरह बहाए गए पैसे, हालत सीएचसी से भी खराब
अस्पताल के निर्माण में करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए गए हैं। शानदार भवन के साथ ही तमाम तरह के उपकरण व अन्य सामान यहां उपलब्ध हैं। दूसरे एवं तीसरे फ्लोर पर जाने के लिए लिफ्ट भी लगवाए गए हैं। दिक्कत डॉक्टर एवं स्टाफ की है। अतरौली तहसील की आबादी 10 लाख से अधिक है। समीपवर्ती बुलंदशहर जनपद के जगरवा आदि से भी मरीज आ जाते हैं। चिकित्सा सुविधा के अभाव में अतरौली एवं आसपास के लोग मजबूर होकर पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय या प्राइवेट अस्पतालों का रुख करते हैं।
वर्ष 2015 में शासनादेश द्वारा 25 डॉक्टर एवं 25 पैरा मेडिकल स्टाफ के पद सृजित हुए थे। सीएमएस को छोड़कर अन्य डॉक्टरों की तैनाती नहीं हुई है। पैरामेडिकल स्टाफ में 25 में से 17 पद रिक्त हैं। महानिदेशक को पत्र लिखकर डॉक्टर एवं पैरा मेडिकल स्टाफ की तैनाती करने की मांग की गई है।
- डॉ. प्रदीप कुमार, सीएमएस, 100 शैय्या युक्त संयुक्त चिकित्सालय
100 शैय्या युक्त संयुक्त चिकित्सालय में तीन चिकित्सक अटैच्ड हैं। एक बाल रोग विशेषज्ञ को अभी अटैच किया गया है। चिकित्सकों के अप्वाइंटमेंट हुए हैं। आचार संहिता के कारण दिक्कत हो रही होगी। जल्द ही वहां चिकित्सक एवं अन्य व्यवस्था कराने की कोशिश करेंगे।
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- डॉ. नीरज त्यागी, सीएमओ
पद सृजित
पुरुष इकाई
फिजिशियन 2, चेस्ट फिजिशियन 1, बाल रोग विशेषज्ञ 1, रेडियोलॉजिस्ट 1, पैथोलॉजिस्ट 1, स्किन-एसटीडी 1, कॉडियोलॉजिस्ट 1, एनेस्थेटिस्ट 2, जर्नल सर्जन 2, आर्थोपेडिक सर्जन 1, ईएनटी 1, नेत्र सर्जन 1, ईएमओ 3, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक 1,
महिला इकाई
चिकित्सा अधीक्षक 1, स्त्री रोग विशेषज्ञ 1, निश्चेतक 1, रेडियोलॉजिस्ट 1, पैथोलॉजिस्ट 1 और ईएमओ 1
कुछ प्रमुख बिंदु...
- जनवरी में करीब 125 प्रसव, स्टाफ नर्स के माध्यम से
- 15 प्रतिशत लोग भी अस्पताल में भर्ती नहीं होते, जबकि मानक न्यूनतम 60 प्रतिशत है
- कोरोना के कारण ओपीडी में 600 मरीज हैं। 1200 तक लोग पहुंचते हैं।
- दो बजे के बाद इमरजेंसी सहित अस्पताल का गेट बंद हो जाता है
- इस अस्पताल में 14 वेंटिलेटर है लेकिन इस्तेमाल के लिए विशेषज्ञ व स्टाफ नहीं
- सर्जन के अभाव में सर्जरी नहीं होती है।
- ऑक्सीजन प्लांट किस काम का, जब अस्पताल में न मरीज एवं न डॉक्टर
- कोरोना की तीसरी लहर का सामना करने के लिए पीडियाट्रिक आईसीयू भी बनाया गया है
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