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बरेली की जेल में बंदियों की मौत के बाद जेल प्रशासन सतर्क

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बरेली की सेंट्रल जेल में फांसी की सजा पाए तीन बंदियों की बीमारी से मौत हो जाने के बाद अलीगढ़ जेल का प्रशासन भी बीमार बंदियों को लेकर सर्तक हो गया है। ऐसे बंदियों की सूची तैयार कर उनके स्वास्थ्य परीक्षण की नए सिरे से तैयारी की जा रही है। साथ ही उनको सघन चिकित्सकों की देखरेख में रखने की व्यवस्था की जा रही है।
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जिला कारागार में बंदियों की क्षमता 1148 है। लेकिन यहां पर कुल 3100 बंदी हैं। इस तरह क्षमता से तीन गुना अधिक बंदी जेल में हैं। इनमें 132 महिला बंदी भी हैं। महिलाओं के लिए अलग बैरक हैं। जेल में कुल 40 बंदी ऐसे हैं जिनका अस्पताल में उपचार चल रहा है। 10 बंदी ऐसे हैं जिनका गंभीर बीमारी के चलते बाहर अस्पताल में उपचार चल रहा है। इन्हें सघन निगरानी में रखा गया है। 25 बंदी एचआईवी से भी ग्रस्त हैं। एक वर्ष में दो बंदियों की बीमारी के चलते मृत्यु हुई है। एक बंदी की 92 वर्ष की अवस्था में जेएन मेडिकल कालेज में बीमारी से मौत हुई थी। जबकि एक बंदी की लगातार तीन वर्ष तक डायलिसिस के चलते दिल्ली में उपचार के दौरान मौत हुई थी। बरेली जेल में लगातार तीन बंदियों की मौत के बाद स्थानीय जेल प्रशासन भी बंदियों की सेहत को लेकर सतर्क हो गया है। हालांकि जेल प्रशासन का दावा है कि वह पहले से ही स्वास्थ्य परीक्षण और बीमार बंदियों के उपचार को लेकर सावधानी बरतते रहे हैं।
‘गत अक्टूबर महीने में टीबी और चेस्ट के लिए बंदियों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया था। इसमें 46 मरीजों की फाइंडिंंग की गई और स्क्रीनिंग कराई गई। इसमें पांच मरीजों को टीबी पॉजिटिव पाया गया। प्रत्येक शनिवार को जिला क्षय रोग विभाग की स्क्रीनिंग कमेटी मरीजों की टीबी की जांच करती है। बीमार बंदियों को लेकर जेल प्रशासन पूरी संवेदनशीलता के साथ काम कर रहा है।’
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- आलोक सिंह, वरिष्ठ जेल अधीक्षक
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