नुमाइश को कोहिनूर मंच पर रविवार की रात सूफी नाइट में नूरा सिस्टर्स (ज्योति नूरा और सुल्ताना नूरा) के सुरों का जादू ऐसा चला की श्रोता झूम उठे। अल्लाह हू... सूफी गीत से उन्होंने कार्यक्रम की शुरूआत की। इसके बाद उन्होंने मीठे पान दी गिल्लौरी... और मैं यार दा दीवाना, मेरा यार ही खुदा है... जैसे गीत गाकर समां बांध दिया। पंडाल में कम भीड़ होने के बाद भी तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
राजकीय औद्योगिक एवं कृषि प्रदर्शनी के कोहिनूर मंच पर सजी सूफी नाइट का शुभारंभ एसएसपी आकाश कुलहरि उनकी पत्नी स्वस्ति राव कुलहरि, पूर्व मेयर शकुंतला भारती सहित अन्य पदाधिकारियों ने दीप प्रज्ज्वलित करके किया। इसके बाद दोनों बहनों ने रात सवा नौ बजे मंच संभाला और अपनी सुरीली आवाज में सूफी गीत गाकर समां बांध दिया। श्रोता उनके गीतों पर झूम उठे। तालियों से पंडाल गूंज उठा। लोगों का उत्साह देख नूरा सिस्टर्स ने श्रोताओं का धन्यवाद भी अदा किया। करीब रात 10:30 बजे तक चले कार्यक्रम में दोनों बहनों ने अंत तक अपने गीतों से समां बांधे रखा।
खुदा के लिए गाते हैं, खुद को भूल जाते हैं
सूफी नाइट में आईं सूफी गायक ज्योति नूरान और उनकी बहन सुल्ताना नुरान ने बताया कि वह खुदा के लिए गाती हैं। गाते समय खुद को भूल जाती हैं। बस खुदा ही उनके जहन में रहता है। उन्होंने बताया कि कभी उनकी मोटी आवाज को लेकर लोग उन पर तंज कसते थे और कहते थे कि तुम कभी सफल नहीं हो पाओगी।
मगर, उन सबकी भ्रांतियों को हमने खुदा के दिए हुनर से दूर कर दिया। सुल्ताना नूरां ने बताया कि उन्होेंने सात और ज्योति ने पांच साल की उम्र से ही गाना शुरू कर दिया था। अपनी पहली प्रस्तुति 2005 में दूरदर्शन के एक कार्यक्रम में दी थी। उन्होंने कहा कि हर गायक के गाने का अपना अंदाज होता है। समय के साथ संगीत में बदलाव हो रहे हैं। दोनों बहनों ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि वह अपने जीवन को नशे में बर्बाद न करें। हर किसी के भीतर एक प्रतिभा छिपी होती है। उस प्रतिभा को पहचानों और उसको निखारने के लिए जुट जाओ, फिर दुनिया आपके हुनर की दीवानी हो जाएगी।