पत्रकारों से वार्ता करते करबला के मुतवल्ली मुख्तार जैदी। साथ में मौलाना हसन व अन्य।
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10वीं मोहर्रम यानी मंगलवार को मुहर्रम के जुलूस में शामिल लोग अब नुमाइश मैदान के बजाय इसी मैदान में बनी मस्जिद में जोहर की नमाज पढ़ेंगे। करीब 25 साल से मैदान में नमाज होती थी। अब 25 साल की रवायत में बदलाव किया गया है। यह फैसला शहर मुफ्ती मोहम्मद खालिद हमीद व करबला के मुतवल्ली मुख्तार जैदी ने लिया है।
शाहजमाल स्थित करबला के मुतवल्ली मुख्तार जैदी ने अमर उजाला से कहा कि नुमाइश मैदान में नमाज पढ़ने के चलते किसी की भावनाएं आहत हो सकती हैं। अनर्गल बातें सोशल मीडिया पर वायरल हो सकती हैं, जो अमन-चैन की फिजाओं में जहर घोल सकती हैं। लिहाजा, शहर मुफ्ती की सहमति से जुलूस के दौरान केवल मस्जिद में ही नमाज पढ़ने का फैसला लिया गया है।
मुख्तार जैदी ने कहा कि जिला प्रशासन उनके जुलूस में सहयोग करता है, तो उनका भी फर्ज है प्रशासन को सहयोग करें। इमाम जुमा मौलाना हसन मोहम्मद ने कहा कि इमाम हुसैन जुल्म के खिलाफ थे और मजलूमों के मददगार थे। इस अवसर पर एएमयू ओल्ड ब्वॉयज एसोसिएशन के उपाध्यक्ष आजम मीर, मुर्तजा जैदी, नादिर अब्बास नकवी, सरफराज अली, डॉ. तौफीक, शाहिद मौजूद रहे।
ढोल-ताशे, ट्यूब लाइट फोड़ने से करें परहेज : शहर मुफ्ती
शहर मुफ्ती मोहम्मद खालिद हमीद ने लोगों से कहा कि वह 10वीं मुहर्रम जुलूस के दौरान ढोल-ताशे बजाने व ट्यूब लाइट फोड़ने से दूरी बनाएं। यह कोई खुशी का नहीं, बल्कि गम का दिन है। इमाम हुसैन किसी एक फिरके, एक मजहब के नहीं हैं, बल्कि वह इंसानियत के इमाम हैं।