अलीगढ़ में साइबर ठगी में साइबर हैकर अलग-अलग मॉडस अपरेंडी अपना रहे हैं। वैसे तो इस ठगी का हब जमताड़ा है। मगर अब कुछ विशेष प्रकार की ठगी में दिल्ली, मथुरा के गोवर्धन, अमरोहा, हरियाणा के फरीदाबाद से हो रही है। पिछली कुछ घटनाओं पर गौर करें तो कॉल सेंटर चलाकर ठगी करने के धंधे में अलीगढ़ हब बनता जा रहा है। यह पहला मौका नहीं। इससे पहले भी कुछ विशेष प्रकार की ठगी कॉल सेंटरों के जरिये अलीगढ़ से उजागर हुई हैं।
पिछले दिनों अलीगढ़ पुलिस ने ही दो ठिकानों से फर्जी शादी डॉट काम केंद्र चलाने और सुदूर राज्यों के लोगों को ठगने का धंधा पकड़ा। कई युवतियों को उसमें जेल भेजा गया। इसके अलावा समय-समय पर अपने शहर में अन्य छोटे साइबर ठग भी पकड़े जाते रहे हैं। इसे लेकर सीओ साइबर मोहसिन खान बताते हैं कि उनकी टीम लगातार इस पर काम करती रहती हैं। वहीं जमालपुर से जफर अहमद के पकडे़ जाने के मामले में सीओ तृतीय शिव प्रताप बताते हैं कि ओडिशा पुलिस इस मामले में जो भी मदद मांगेगी, की जाएगी।
देश में नौकरी के नाम पर अब तक की सबसे बड़ी ठगी करने वाले रैकेट ने बेहद संगठित आपराधिक गिरोह चलाया। ओडिशा पुलिस की जांच व गिरफ्तार जफर अहमद से पूछताछ में उजागर हुआ है कि जिन राज्यों में वह लोगों को ठगने का प्लान बनाते थे, उन्हीं राज्यों के किसी शहर में अपना कॉल सेंटर खोलते थे। मुख्य अड्डा नोएडा में ही बना रखा था। दूसरे राज्यों में खोले जाने वाले कॉल सेंटर पर कर्मचारी यूपी और विशेषकर अलीगढ़ से ही भेजे जाते थे। जफर इस गिरोह के संस्थापक सदस्यों में से एक था।
इस गिरोह में 10 से 12 और मुख्य नाम हैं, जिनकी ओडिशा पुलिस अभी तलाश रही है। इधर, जफर को जेल भेज दिया गया है।महानगर के सिविल लाइंस जमालपुर हमदर्द नगर , गोल मार्केट के जफर अहमद को ओडिशा की आर्थिक अपराध शाखा टीम शुक्रवार को यहां से गिरफ्तार करके ले गई है। उस पर एक ऐसा गिरोह चलाने का आरोप है, जिसने सरकारी नौकरियों के नाम पर 50 हजार से ज्यादा लोगों से ठगी की है। यह ठगी गुजरात, कर्नाटक, ओडिशा, आंध प्रदेश, पश्चिम बंगाल आदि राज्यों में की गई। जफर को जेल भेजने से पहले हुई पूछताछ व ओडिशा पुलिस की जांच में पता चला है कि जफर इस गिरोह के मुख्य संस्थापक सदस्यों में से एक था।
उसके दो-तीन मुख्य साथी और हैं, जबकि इस गिरोह के खास सदस्यों की संख्या 10 से 12 है। यह अपने टारगेट राज्यों में पहले नौकरी आवेदन के लिए प्रचार प्रसार करते थे, जब लगता था कि वहां से अच्छे आवेदन आ रहे हैं तो उस राज्य के किसी शहर में मकान किराये पर लेकर कॉल सेंटर खोलते थे। फिर ऑपरेशन ठगी पूरा होने के बाद वहां से अपना कॉल सेंटर बंद कर गायब हो जाते थे। इस दौरान कॉल सेंटर के कर्मचारियों को वहां पहुंचाने और वापस घर छोड़ने तक का जिम्मा कंपनी के खास लोगों पर रहता था। उन्हें वेतन देने के साथ-साथ रहने खाने का इंतजाम भी करते थे। इसे गिरफ्तार करने वाली टीम में शामिल रहे ओडिशा की ईओडब्ल्यू शाखा के एसआई तपश साहू बताते हैं कि बहुत से तथ्य और बहुत से नाम पूछताछ व जांच में सामने आए हैं। वह गोपनीय हैं। जो नाम सामने आए हैं, उन तक पहुंचने का प्रयास जारी है।