संपत्ति कर का बकाया न चुकाने पर नगर निगम द्वारा अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का एसबीआई में संचालित खाता सीज कराने के मामले में मंगलवार को एएमयू प्रशासन ने केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को पत्र लिखा है। पत्र में संपत्ति कर के बकाए का मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित होने की बात कही गई है। साथ ही कहा है कि एएमयू का खाता सीज कर देने से जेएन मेडिकल कॉलेज में चल रहे कोरोना वैक्सीन के ट्रायल पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। गौर हो कि एएमयू पर 14.98 करोड़ रुपये का संपत्ति कर बकाया है।
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय ने कहा है कि यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट के अलावा अलीगढ़ के स्थानीय न्यायालय में भी विचाराधीन है। विश्वविद्यालय के जनसंपर्क विभाग के एमआईसी प्रोफेसर शाफे किदवई ने कहा कि विश्वविद्यालय अपने परिसर में स्थित आवासीय भवनों का टैक्स अदा करता रहा है, जबकि कक्षाओं, प्रयोगशालाओं और पुस्तकालयों आदि से संबंधित भवनों पर नगर पालिका, अलीगढ़ द्वारा पूर्व में टैक्स से छूट प्रदान की जा चुकी है। नगर निगम, अलीगढ़ के अस्तित्व में आने के बाद निगम ने विश्वविद्यालय को मिलने वाली छूट समाप्त कर दी थी, जिसके खिलाफ विश्वविद्यालय ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर दी थी, जो विचाराधीन है।
इसके अलावा विश्वविद्यालय परिसर स्थित नगर निगम के नलकूपों और वाटर सप्लाई पर होने वाली बिजली के खर्च के मद में विश्वविद्यालय के 9 करोड़ रुपये नगर निगम पर बकाया हैं। यहां पर यह स्पष्ट कर देना आवश्यक है कि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय तथा कई और अन्य केंद्रीय संस्थानों को उच्च न्यायालय द्वारा हाउस टैक्स से छूट प्रदान की जा चुकी है। कक्षाओं, प्रयोगशालाओं तथा पुस्तकालयों पर किसी प्रकार का टैक्स नहीं लगाया जाता है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने चिंता व्यक्त की है कि बैंक अकाउंट को सीज करने से कोरोना वायरस के खिलाफ एएमयू के जेएन मेडिकल कॉलेज द्वारा लड़ी जा रही जंग पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। जेएन मेडिकल कॉलेज में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च और नेशनल इंस्टीट्यूट आफ वायरोलॉजी के सहयोग से भारत बायोटेक द्वारा निर्मित कोविड 19 संक्रमण निरोधक टीका कोवाक्सिन के तीसरे चरण का ट्रायल जारी है। एक हजार वॉलिंटियर्स को दो खुराक दी जा चुकी हैं। यह ट्रायल अगले 6 महीने तक जारी रहेगा। इन हालात में नगर निगम द्वारा की गई कार्रवाई बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।