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जेएन मेडिकल कॉलेज ने एएमयू की तारीफ में चार चांद लगाए

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56 साल पहले 1964 में प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी आए थे। - फोटो : CITY OFFICE
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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष समारोह के वर्चुअल संबोधन में मंगलवार को पीएम मोदी ने कोरोना काल में एएमयू की दिल खोल कर सराहना की है। लेकिन उस तारीफ में जेएन मेडिकल कॉलेज में किए गए कार्यों ने चार चांद लगा दिए। कोरोना काल में जेएन मेडिकल कॉलेज में दिन रात जांच, उपचार और शोध जारी है। वैक्सीनेशन की योजना बन रही है। कुलपति प्रो. तारिक मंसूर भी खुद वैक्सीनेशन ट्रायल के लिए आगे आए। कुलाधिपति ने वैक्सीनेशन में भरपूर सहयोग का भरोसा दिलाया है।
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गौर हो कि मेडिकल कॉलेज में इस दौरान लगभग दो लाख कोरोना टेस्ट हुए हैं। प्लाज्मा बैंक की स्थापना हुई। एएमयू ने एक करोड़ 40 लाख रुपये पीएम केयर्स फंड में भी दिए। अधिसंख्य मरीज यहां से स्वस्थ होकर लौटे। मेडिकल कॉलेज के प्रिसिंपल प्रो. शाहिद अली सिद्दीकी ने कहा कि पीएम मोदी ने संवादहीनता को दूर किया है, जिससे यहां की फैकल्टी, छात्रों और दूसरे स्टाफ को नई ऊर्जा मिली है। उनके संबोधन से देश दुनिया में मेडिकल कॉलेज की छवि और कार्यप्रणाली को लेकर भरोसा बढ़ा है। पीएम ने सच्चाई को देश के सामने उजागर किया है। उन्होंने कहा है कि आम जनमानस के लिए एएमयू हमेशा सहयोग करता रहा है और करता रहेगा। हर संस्थान में कुछ जगह कुछ कमियां हर जाती हैं, जिसे वहां के लोग निरंतर दूर करने में लगे रहते हैं। लेकिन इन छोटी कमियों को लेकर नजरिया नहीं बनाना चाहिए। प्रो. शाहिद ने कहा कि अब विद्यार्थियों को भी चाहिए कि वो भी अपने स्तर पर हर किसी से यथासंभव संवाद कायम कर सकारात्मक ऊर्जा के साथ आगे बढ़ें। हर नागरिक को अपने देश से प्रेम होता है, होना भी चाहिए। सच्ची देश सेवा भी यही है कि हम अपने क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए प्रयासरत रहें, जिसका लाभ सभी को हो। एएमयू ऐसा विवि है, जहां प्राइमरी स्कूल से लेकर इंटर कॉलेज, डिग्री कॉलेज और रिसर्च लैब तक सब मौजूद है।
गौर हो कि पूर्व पीएम स्व. पंडित जवाहर लाल नेहरू के नाम पर दो अक्तूबर 1962 में जेएन मेडिकल कॉलेज की स्थापना पुराने भौतिक विज्ञान विभाग में हुई थी, जो अब बायो केमिस्ट्री डिपार्टमेंट है। यहां पढ़ाई होती थी, जबकि तिब्बिया कॉलेज में ओपीडी व सर्जरी होती थी। मेडिकल कॉलेज की स्थापना से पहले ही विश्वविद्यालय में इंस्टीट्यूट ऑफ आप्थामोलॉजी संचालित हो रहा था, जिसकी आधारशिला तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री राजकुमारी अमृत कौर ने रखी थी। 1955 में सऊदी अरब गए प्रतिनिधिमंडल को बादशाह शाह सऊद ने 10 लाख रुपये मेडिकल कॉलेज के लिए दिया था
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