सीएए और एनआरसी के विरोध में 15 दिसंबर की रात हुए बवाल के संबंध में जिला प्रशासन ने एएमयू प्रशासन को पत्र लिख बवाल के संबंध में की गई आंतरिक कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है। यह तीसरा मौका है जब जिला प्रशासन की ओर से एएमयू को रिमाइंडर जारी किया गया है। मगर, एएमयू प्रशासन ने अभी तक रिपोर्ट नहीं भेजी है। इस कारण एएमयू बवाल की मजिस्ट्रेटी जांच भी प्रभावित हो रही है।
सीएए और एनआरसी के विरोध में 15 दिसंबर की रात को एएमयू छात्रों ने बाब-ए-सैयद पर जोरदार प्रदर्शन किया था। हालात में काबू करने के लिए इंतजामिया ने कैंपस में पुलिस को बुला लिया था। इस पर छात्रों और पुलिस के बीच टकराव हो गया था। दोनों ओर से पथराव हुआ। पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे थे। हिंसा में कई छात्र और पुलिस कर्मी घायल हुए थे। इस घटना की जिलाधिकारी ने मजिस्ट्रेटी जांच बैठा दी थी। जांच में पब्लिक पार्टी, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों और आरएएफ कमांडेंट के बयान आदि दर्ज कराए गए हैं। जांच एडीएम एफआर की देखरेख में हो रही है।
एडीएम एफआर विधान जयसवाल के मुताबिक जांच में एएमयू प्रशासन की आंतरिक कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी जा रही है। यह तीसरा मौका है जब रिपोर्ट के संबंध में रिमाइंडर भेजा गया है। रिपोर्ट मिलते ही मजिस्ट्रेटी जांच को आगे बढ़ाया जाएगा। इधर, एएमयू के एमआईसी प्रो. साफे किदवई का कहना है कि प्रशासन के पत्र के संबंध में फिलहाल कोई जानकारी नहीं है। अगर, वहां से पत्र आया है तो उसका संज्ञान लिया जाएगा।