अलीगढ़ महानगर की सड़कों पर खुले घूमते पशु मिले तो पशुपालकों को महंगा पड़ेगा। जुर्माना लगने के साथ मुकदमा भी दर्ज होगा। बृहस्पतिवार को सांड़ की घटना के बाद नगर आयुक्त ने सख्त रवैया अपनाया है और हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है।
सड़कों पर आवारा घूमने वाले गोवंश से होने वाली घटनाओं पर नगर आयुक्त अमित आसेरी ने शुक्रवार को अधीनस्थों के साथ आवारा गोवंश पर लगाम लगाने के लिए पशुपालकों पर सख्त कार्रवाई करने को लेकर समीक्षा की। नगर आयुक्त ने सात दिवसीय विशेष नंदी अभियान चलाए जाने का निर्णय लिया। अभियान में सुबह, दोपहर और शाम की शिफ्ट में नगर निगम के एक पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी के नेतृत्व में चार कैटल कैचर मशीन और 25 कर्मचारियों की टीमों को लगाया गया है, जो रोजाना नगरीय क्षेत्र में आवारा घूमने वाले सांड़ को पकड़ कर नंदी गोशाला में छोड़ा जाएगा।
सांड़ की सूचना के लिए हेल्पलाइन जारी
सांड़ को रखने के लिए बरौला जाफराबाद स्थित गोशाला को पूर्ण रूप से नंदी गोशाला में तब्दील करने और सांड़ की सूचना के लिए हेल्पलाइन 7500441344 जारी करने निर्णय लिया है। पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डॉ. राजेश वर्मा को नंदी गोशाला में समुचित देखरेख व व्यवस्था कराए जाने के साथ-साथ सड़कों पर आवारा घूमने वाले के पशुओं के पशुपालकों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध जुर्माना लगाने के साथ संबंधित थाने में मुकदमा दर्ज कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। नगर आयुक्त ने कहा कि बढ़ती हुई गर्मी में पशुओं के व्यवहार में भी परिवर्तन होता है। नागरिक संयम रखें। हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं, जहां पर भी आवारा पशु दिखाई दे नगर निगम को सूचना दें।
पशु पालकों पर होगी कार्रवाई
नगर आयुक्त ने कहा कि यदि किसी पशुपालक के पशु सड़क पर आवारा घूमते हुए पाए जाते हैं, तो उनको पकड़ कर संबंधित पशुपालकों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ आवारा पशुओं के विचरण से यदि कोई अप्रिय घटना घटित होती है, तो उसकी पूर्ण जिम्मेदारी संबंधित पशु पालक की होगी।
बच्चे पर सांड़ ने किया था हमला
गांधी पार्क थाने के परमानंद बिहारी कॉलोनी में पुलिस से रिटायर्ड एसआई महीपाल सिंह अपने ढ़ाई साल के नाती कृतीक पुत्र राजकुमार सिंह को लेकर गुरूवार सुबह साढ़े सात बजे के लगभग टहलने गए थे। बच्चे को चंद मिनटों के लिए छोड़ा ही था कि एक आवारा सांड़ वहां पर आ गया। मासूम को अकेला देखकर सांड़ ने बच्चे पर हमला बोल दिया, बच्चे को दूर पटक दिया था। इतना ही नहीं, उसके बाद सांड़ मासूम के ऊपर बैठ गया था। बच्चा सांड़ के अगले पैरों के नीचे था। तभी मासूम के बाबा ने उसे सांड़ के कब्जे से मुक्त कराया।