खामनेई की मौत की खबर सुनकर रोने लगे
खामनेई की मौत की खबर मिलते ही अलीगढ़ के शिया समुदाय के लोग रोने लगे। शहर के विभिन्न इलाकों में लोगों के घरों में मातम जैसा माहौल दिखाई दिया और कई स्थानों पर लोग भावुक होकर रोते नजर आए। लोगों ने अपनी दुकानें बंद कर शोक व्यक्त किया। हर आंख नम दिखाई दी और लोगों ने इसे पूरी इंसानियत के लिए बड़ी क्षति बताया। लोगों ने कहा कि खामनेई केवल एक नेता नहीं बल्कि मार्गदर्शक और धार्मिक प्रतीक थे।
एएमयू में आए थे ईरान के पूर्व विदेश मंत्री
अमेरिका के हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई के साथ पूर्व विदेश मंत्री डॉ. अली अकबर विलायती की भी मौत हो गई थी। डॉ. अली अकबर वर्ष 2014 में एएमयू में अली डे पर आयोजित कार्यक्रम में आए थे। खामनेई ने उन्हें मार्च 2021 में ईरान के सर्वोच्च नेता के अंतरराष्ट्रीय मामलों के सलाहकार के रूप में नियुक्त किया गया था। अंजुमन तंजीमुल अजा कमेटी के सचिव सैयद नादिर अब्बास नकवी ने बताया कि उन्होंने पूर्व विदेश मंत्री डॉ. अली अकबर से मुलाकात की थी। वह काफी विनम्र थे।
एएमयू में आए थे ईरान के पूर्व विदेश मंत्री
अमेरिका के हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई के साथ पूर्व विदेश मंत्री डॉ. अली अकबर विलायती की भी मौत हो गई थी। डॉ. अली अकबर वर्ष 2014 में एएमयू में अली डे पर आयोजित कार्यक्रम में आए थे। खामनेई ने उन्हें मार्च 2021 में ईरान के सर्वोच्च नेता के अंतरराष्ट्रीय मामलों के सलाहकार के रूप में नियुक्त किया गया था। अंजुमन तंजीमुल अजा कमेटी के सचिव सैयद नादिर अब्बास नकवी ने बताया कि उन्होंने पूर्व विदेश मंत्री डॉ. अली अकबर से मुलाकात की थी। वह काफी विनम्र थे।
दुबई जाना किया रद्द
इंटरनेशनल फ्लाइट में सीट बुकिंग करने वाले मलिक ट्रैवल्स के रजनीश मलिक ने बताया कि दुबई जाने वाले छह लोगों ने टिकट निरस्त कराया है। जर्मनी के शहर कोलोन में तीन से छह मार्च तक होने वाले सेमिनार में अलीगढ़ के उद्यमियों को भी जाना था, लेकिन अब फ्लाइट रद्द कर दी गईं हैं। तीन-चार उद्यमियों ने टिकट निरस्त कराया है। एयर इंडिया और इंडिगो ने मीडिल ईस्ट की सभी उड़ानें रद्द कर दी हैं। एमीरेटस एयरलाइंस के सभी हवाई जहाज खड़े करा दिए गए हैं। इस युद्ध से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोगों का आना-जाना प्रभावित हुआ है।
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई की मौत की खबर के बाद उन्हें जानने और उनसे मुलाकात कर चुके लोगों की यादें ताजा हो गई हैं। इन्हीं में एक मौलाना अहमद मजलिसी भी हैं, जिन्होंने खामनेई से 1996 में मुलाकात की थी। उन्हें याद करके वह भावुक हो गए। मौलाना मजलिसी ने कहा कि शिक्षा और संस्कार को खामनेई एक साथ रखना चाहते थे। उनकी शहादत को हमेशा याद रखा जाएगा।
ईरान के कोम स्थित अल-मुस्तफा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी में मौलाना मजलिसी ने वर्ष 1992 से 2009 तक मौलाना मजलिसी ने इस्लाम से संबंधी पाठ्यक्रमों का अध्ययन किया। उन्होंने कुरानिक साइंस विषय में उच्च शिक्षा प्राप्त की थी। वर्ष 1996 में यूनिवर्सिटी के 50 टॉपर छात्रों के एक विशेष कार्यक्रम में उन्हें खामनेई से मिलने का अवसर मिला मिला था। इन टॉपर छात्रों में वह भारत से अकेले प्रतिनिधि थे। उन्होंने कहा कि उस कार्यक्रम में खामनेई भी आए थे, जिन्होंने पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया था।
मौलाना मजलिसी ने कहा कि उनकी नजर में खामनेई की शख्सियत बेहद प्रभावशाली थी। उनमें एक अलग ही आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता महसूस होती थी। उनसे एक बार मिलने के बाद दोबारा मिलने की इच्छा स्वतः पैदा हो जाती थी। मौलाना मजलिसी ने कहा कि मुलाकात के दौरान खामनेई ने संदेश भी दिया था कि केवल शिक्षा प्राप्त करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इच्छाओं पर नियंत्रण, नैतिक मूल्यों और अच्छे संस्कारों को जीवन में बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। खामनेई का व्यक्तित्व सादगी, अनुशासन और आध्यात्मिकता का प्रतीक था। उनकी बातें आज भी जीवन में मार्गदर्शन देती हैं और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उन्होंने कहा कि विश्व ने एक प्रभावशाली धार्मिक नेतृत्व को खो दिया है, जिसकी शिक्षाएं लंबे समय तक लोगों को प्रेरित करती रहेंगी।