सपा बसपा गठबंधन में अलीगढ़ लोकसभा सीट बसपा के खाते में आ गई है। गुरुवार को लखनऊ में इसका औपचारिक एलान कर दिया गया। बसपा जिलाध्यक्ष तिलकराज यादव का कहना है कि 28 फरवरी तक उम्मीदवार की घोषणा भी हो जाएगी, आलाकमान ने इसका संकेत दिया है। इसके बाद पार्टी सपा के साथ मिल कर चुनाव मैदान में उतर जाएगी और जीत पक्की करेगी।
सपा-बसपा गठबंधन होने के बाद से ही ये तय हो गया था कि अलीगढ़ सीट किसी एक पार्टी को मिलेगी। उस वक्त फार्मूला तय हुआ था कि जिस पार्टी का उम्मीदवार मोदी लहर में वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में नंबर दो पर रहा था, उसी पार्टी को चुनाव लड़ने का मौका दिया जाए। हुआ भी यही। बसपा अलीगढ़ लोकसभा चुनाव 2014 में दूसरे नंबर पर थी, इसलिए अलीगढ़ में उनको मौका दिया गया।
बसपा कार्यकर्ताओं में जोश
अलीगढ़ लोकसभा सीट बसपा के खाते में जाने से पार्टी में जबरदस्त उत्साह है। अभी तक की सूचना के अनुसार बसपा इस बार अलीगढ़ से जाट समुदाय के एक नेता को चुनाव लड़ाने का मन बना रही है। जिससे उसका दलित-मुस्लिम-पिछड़ा-यादव गठजोड़ जाट वोटों के जुड़ने से और मजबूत हो सके। पार्टी ने इसीलिए जाट समुदाय से उम्मीदवार उतारने की तैयारी की है। वहीं मुस्लिम बाहुल्य होने के नाते एक धड़ा मान रहा था कि सपा को अलीगढ़ लोकसभा सीट पर दावेदारी मिल जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब सपाई ये तो कह रहे हैं कि वो बसपा उम्मीदवार को बड़े अंतर से जिताएंगे लेकिन उनको खुद चुनाव लड़ने का मौका नहीं मिलने से कुछ मायूसी भी हुई है।
सपा-बसपा गठबंधन में रालोद के शामिल होने के आसार बढ़े
यूपी में भाजपा को हराने के लिए सपा-बसपा और रालोद का गठबंधन की संभावना बढ़ जाने से पार्टी कार्यकर्ता उत्साह में है। गुरुवार को इगलास विधानसभा के कार्यकर्ताओं की बैठक गोंडा क्षेत्र के गांव बसौली में हुई, जिसमें लोकसभा चुनाव 2019 की तैयारी में जुटने का आह्वान किया गया। चौ. बोहरन सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में रालोद नेताओं ने गठबंधन के लिए एकजुटता से काम करने और जिताने का संकल्प लिया। रालोद जिलाध्यक्ष रामबहादुर चौधरी ने कहा कि यूपी में महागठबंधन का तूफ ान है जिसमे भाजपा का सफ ाया हो जाएगा। महानगर अध्यक्ष अनीस एडवोकेट ने कहा कि रालोद कार्यकर्ता और नेता चुनाव के लिए तैयार हैं। किसान, गरीब, मजदूर वर्ग तानाशाह सरकार को उखाड़ने के लिए उत्सुक बैठा है। उन्होंने कहा कि रालोद की जीत में अहम भूमिका होगी। बैठक का संचालन रामवीर सिंह ने किया। इस अवसर पर वरिष्ठ उपाध्यक्ष फू ल सिंह धनगर, पूर्व मंत्री महेंद्र सिंह, मास्टर केवल सिंह, राजेश चौधरी, प्रहलाद सिंह, डॉ हरचरण सिंह, चौ हरेंद्र सिंह, मौ जाहिद, राव हामिद, अजय कुमार आदि मौजूद रहे ।
गठबंधन से जाट प्रत्याशी आया तो कांग्रेस और भाजपा नये फार्मूूले पर आ सकती हैं
बसपा-सपा गठबंधन से जाट प्रत्याशी उतारने की संभावना सामने आने के बाद कांग्रेस और भाजपा में लोकसभा उम्मीदवार को लेकर गहन मंथन शुरू हो गया है। दोनों शीर्ष पार्टियों में जाट समुदाय के लाखों वोटों को लुभाने के लिए विचार शुरू हो गया है। कांग्रेस से दावेदारी कर रहे जाट नेता चौ. बिजेंद्र सिंह भी इस उहापोह में फंसते नजर आ रहे हैं कि अगर गठबंधन से जाट प्रत्याशी सामने आया तो उनकी दावेदारी कहीं खटाई में न पड़ जाए। इधर, भाजपा को भी जाट वोटों के खिसकने का डर हो रहा है। जिससे कांग्रेस और भाजपा दोनों के सामने जाट वोटों को अपने पक्ष में रखने की बड़ी चुनौती सामने आ रही है। हालांकि अभी तक कांग्रेस और भाजपा के उम्मीदवार घोषित नहीं हुए हैं, वहीं बसपा से भी जाट उम्मीदवार की आधिकारिक घोषणा होनी बाकी है।
कौन सी सीट पर किस दल का प्रत्याशी चुनाव लड़ेगा, ये गठबंधन का अंदरूनी मामला है। कौन सी सीट किसके खाते में रहेगी, किसको देेंगे। ये उनको ही तय करना है। हमने पूर्व में वर्ष 2004 के लोस चुनाव में बसपा से चुनाव लड़े ठा. जयवीर सिंह को हराया था। वर्ष 2009 में मैं 24 हजार वोटों से ठा. जयवीर की धर्मपत्नी एवं बसपा उम्मीदवार राज कुमारी चौहान से हार गया था। हम एक बार फिर से बसपा को हराएंगे। रही बात ये कि बसपा जाट उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रही है तो उसका जवाब ये है कि वर्ष 2002 के विधानसभा चुनाव में मैंने इगलास से पांच जाट उम्मीदवारों को हराया था और दस हजार वोटों से जीता था। कांग्रेस का उम्मीदवार बड़े अंतर से ये चुनाव जीतेगा।
- चौ. विजेंद्र सिंह, जिलाध्यक्ष कांग्रेस।
सपा और बसपा गठबंधन पार्टी का नहीं परिवार का गठबंधन है। इस गठबंधन से कोई भी प्रत्याशी आएगा उसकी जमानत जब्त करा कर उसको घर भेजेंगे। जनता हमारे साथ है। पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को भाजपा की जीत पर पूरा भरोसा है। पीएम मोदी और सीएम योगी के काम से जनता आश्वस्त है।
-ठा. गोपाल सिंह, जिलाध्यक्ष भाजपा।
ये बात पूर्व में ही साफ हो रही थी कि अलीगढ़ लोकसभा सीट गठबंधन में बसपा के खाते में जाएगी। क्योंकि वर्ष 2004 के लोस चुनाव में बसपा से ठा. जयवीर सिंह दूसरे नंबर पर और वर्ष 2009 में बसपा से ही उनकी पत्नी राजकुमारी चौहान जीतीं। वर्ष 2014 में बसपा से अरविंद कुमार (जयवीर सिंह के पुत्र) दूसरे नंबर पर रहे थे। लगातार 15 वर्ष से लोकसभा चुनाव में बसपा अलीगढ़ में बड़ी पार्टी के रूप में स्थापित है। अबकी बार पार्टी गठबंधन से चुनाव लड़ रही है इसलिए जीत सौ फीसदी पक्की है। इसमें कोई दो राय नहीं है। बसपा के अलीगढ़ के उम्मीदवार का एलान 28 फरवरी को हो सकता है। हाईकमान ने इसका इशारा दिया है। गठबंधन का उम्मीदवार ज्यादा से ज्यादा वोट से जीतेगा।
-तिलकराज यादव जिलाध्यक्ष बसपा।
गठबंधन बहुत प्रभावी है। सब मिल कर गठबंधन प्रत्याशी को चुनाव लड़ाएंगे और बड़े अंतर से विजयी होंगे। सपाबसपा गठबंधन लोकसभा चुनाव में अपनी गहरी छाप छोडे़गा और यूपी की राजनीति में नया बदलाव देखने को मिलेगा। बसपा को अलीगढ़ से चुनाव लड़ने का मौका मिला है। सपा बसपा मिल कर गठबंधन प्रत्याशी कोेे चुनाव जिताएंगे।
- अशोक यादव, जिलाध्यक्ष सपा।