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आटा किल्लत दूर करने में ताकत झोक रहा प्रशासन

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शाहजमाल ईदगाह झुग्गी बस्ती में खाने पीने के लिए राशन के इंतजार में बैठी महिला। - फोटो : CITY OFFICE
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बीती 22 मार्च को जनता कर्फ्यू और लॉकडाउन होने के बाद से लगातार आटा किल्लत बनी हुई है। अनावश्यक खरीददारी, भंडारण, कालाबाजारी के कारण इसका भाव 25 से 40 और कहीं-कहीं 45 रुपये किलो तक पहुंच गया है। जिला प्रशासन लगातार इसकी उपलब्धता बनाए रखने का हर संभव प्रयास कर रहा है। आटे की किल्लत का हाल यह है कि महावीरगंज में थोक की दुकानों में दुकानदार हो या ग्राहक सभी को दस-दस किलो की दो बोरी आटा मिल रहा है।
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इस सबंध में रविवार को कलक्ट्रेट में बैठक हुई। बैठक के बाद एडीएम वित्त एवं राजस्व विधान जायसवाल ने बताया कि मिलों को दस हजार क्विंटल गेहूं उपलब्ध कराया जा रहा है। कल भुगतान होने के बाद सरकारी गोदामों से गेहूं दे दिया जाएगा। प्रशासन 40 हजार क्विंटल गेहूं को बाजार में आटा पिसवा कर उपलब्ध कराएगा। सभी एसडीएम को संबंधित क्षेत्र में चक्की से आटा उपलब्ध कराने को कहा गया है। होलसेल में आटा 25 और रिटेल में 27 रुपये किलो में मिलेगा। इधर, रामवे फ्रूटस के मालिक प्रदीप सिंघल ने बताया कि प्रशासन ने रविवार को मॉल से आटा बिकवा कर सही पहल की है। इसे आगे भी जारी रखा जाए। भंडारण कर कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई हो।
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प्रशासन को कम से कम आटा, दाल, चावल, शक्कर, नमक, सरसों का तेल आदि की व्यवस्था उचित मूल्य पर करानी चाहिए।
कृष्ण गोपाल वार्ष्णेय।
लोग आटा को लेकर परेशान हैं। आटा कहीं कहीं 45 रुपये किलो तक बेचा जा रहा है। ये सही नहीं है। इस पर रोक लगाई जाए।
प्रशांत अग्रवाल।
प्रशासन को लॉकडाउन में जरूरी खाद्य वस्तुओं की उपलब्धता करानी होगी। ऐसा नहीं होने पर लोगों में आक्रोश भड़क सकता है।
दीपांशु मित्तल।
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